दिल्ली स्वास्थ्य खरीद घोटाले में पूर्व सीपीए प्रमुख डॉ. विनोद रंगा गिरफ्तारएसीबी का आरोप: दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं, टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान
दिल्ली स्वास्थ्य खरीद घोटाले में पूर्व सीपीए प्रमुख डॉ. विनोद रंगा गिरफ्तारएसीबी का आरोप: दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं, टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान
खबर खास | नई दिल्ली
दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में कथित दवा एवं चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को बड़ी सफलता मिली है। एसीबी ने केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार किया है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि सरकारी खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कर कुछ चुनिंदा निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
डॉ. रंगा को 18 जून को गिरफ्तार किया गया था और 19 जून को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। एसीबी अब मामले की जांच का दायरा बढ़ाते हुए अन्य सरकारी अधिकारियों, निजी आपूर्तिकर्ताओं और इस खरीद प्रक्रिया से लाभान्वित हुए लोगों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है।
एसीबी के अनुसार, दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय (डायरेक्टरेट ऑफ विजिलेंस) को स्वास्थ्य संबंधी खरीद में गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं। जांच में सामने आया कि कुछ अधिकारियों और निजी व्यक्तियों ने मिलकर टेंडर की शर्तों और तकनीकी मानकों में हेरफेर किया, जिससे वास्तविक प्रतिस्पर्धियों को बाहर कर चुनिंदा कंपनियों को ठेके दिलाए गए।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि दवाइयों, सर्जिकल सामान, पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरणों, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशनों, बेडशीट, लिनन तथा अन्य चिकित्सा सामग्री की खरीद बाजार दरों की तुलना में काफी अधिक कीमतों पर की गई।
एसीबी ने यह भी दावा किया है कि पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों, रेडियोलॉजिकल उपकरणों, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशनों, ओआरएस आपूर्ति, दवाइयों और बेडशीट की खरीद से संबंधित कई महत्वपूर्ण फाइलें जांच के दौरान उपलब्ध नहीं कराई गईं। ये दस्तावेज कथित रूप से डॉ. रंगा की व्यक्तिगत निगरानी में थे और आशंका है कि साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से इन्हें जानबूझकर हटाया गया।
अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान डॉ. रंगा लापता फाइलों और कथित खरीद अनियमितताओं से जुड़े अन्य मुद्दों पर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। मामले की जांच फिलहाल जारी है।
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