स्पाइसजेट की डायवर्ट फ्लाइट को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई गई गलत जानकारी, कोर्ट ने दी सख्त चेतावनी के साथ राहत
स्पाइसजेट की डायवर्ट फ्लाइट को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई गई गलत जानकारी, कोर्ट ने दी सख्त चेतावनी के साथ राहत
ख़बर ख़ास | नई दिल्ली
दिल्ली में खराब मौसम के दौरान स्पाइसजेट की एक फ्लाइट को लेकर सोशल मीडिया पर किया गया एक गलत ट्वीट अब एक यात्री के लिए महंगा साबित हुआ। दिल्ली हाई कोर्ट ने फ्लाइट के "हाईजैक" होने की झूठी जानकारी पोस्ट करने वाले यात्री पर ₹30,000 का जुर्माना लगाया है। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि मामला किसी वास्तविक सुरक्षा खतरे से जुड़ा नहीं था और यात्री ने अपनी गलती का जल्द ही एहसास कर पोस्ट को सुधार लिया था। इसी वजह से उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की अनुमति दी गई।
यह मामला वर्ष 2023 का है, जब दुबई से जयपुर जा रही स्पाइसजेट की फ्लाइट खराब मौसम के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर डायवर्ट कर दी गई थी। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते यात्रियों को लगभग छह घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इसी दौरान एक यात्री ने अपनी नाराजगी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जाहिर करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री को टैग किया और जल्दबाजी में लिख दिया कि फ्लाइट "हाईजैक" हो गई है।
यह पोस्ट सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं और मामले को गंभीरता से लिया गया। बाद में जांच में स्पष्ट हुआ कि फ्लाइट पूरी तरह सुरक्षित थी और हाईजैक जैसी कोई घटना नहीं हुई थी। इसके बाद संबंधित यात्री के खिलाफ गलत सूचना फैलाने के आरोप में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
याचिकाकर्ता मोती सिंह राठौर ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की। मामले की सुनवाई जस्टिस सौरभ बनर्जी की एकल पीठ ने की। अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना पोस्ट से सुरक्षा व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है और लोगों में डर व भ्रम का माहौल बन सकता है।
कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता का गलत सूचना फैलाने का कोई दुर्भावनापूर्ण इरादा साबित नहीं हुआ और उसने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पोस्ट में सुधार भी किया। इसी आधार पर अदालत ने एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया, लेकिन शर्त रखी कि याचिकाकर्ता दो सप्ताह के भीतर ₹30,000 की राशि दिल्ली हाई कोर्ट कर्मचारी कल्याण कोष में जमा करेगा।
दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों के लिए एक अहम संदेश माना जा रहा है कि बिना पुष्टि के किसी भी संवेदनशील या सुरक्षा से जुड़े विषय पर गलत जानकारी साझा करना गंभीर कानूनी परिणामों का कारण बन सकता है।
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