दिल्ली और चंडीगढ़ से लेकर लखनऊ और मुंबई तक, जानें चांद निकलने का संभावित समय, पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और करवा चौथ की जरूरी परंपराएं
दिल्ली और चंडीगढ़ से लेकर लखनऊ और मुंबई तक, जानें चांद निकलने का संभावित समय, पूजा का शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और करवा चौथ की जरूरी परंपराएं
खबर खास | चंडीगढ़
करवा चौथ हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। परंपरागत रूप से महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं, यानी भोजन और पानी ग्रहण नहीं करतीं। शाम को पूजा करने और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।
यह त्योहार पारंपरिक रीति-रिवाजों, सोलह शृंगार, करवा चौथ की व्रत कथा और भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश तथा करवा माता की पूजा के साथ मनाया जाता है।
व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्रमा के निकलने का संभावित समय जानना विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। यहां करवा चौथ 2026 की पूजा विधि, व्रत कथा के समय और प्रमुख शहरों में चंद्रोदय के संभावित समय की जानकारी दी गई है।
करवा चौथ 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत कथा का समय
उपलब्ध समय-सारणी के अनुसार, शाम के प्रदोष काल में करवा चौथ की व्रत कथा पढ़ने या सुनने का शुभ समय शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक रहेगा।
परंपरागत रूप से महिलाएं निर्धारित शुभ समय में शाम की पूजा करती हैं, देवी-देवताओं को प्रणाम करती हैं और व्रत कथा सुनती हैं। पूजा की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है।
करवा चौथ 2026: शहरवार चंद्रोदय का समय
प्रमुख शहरों में चंद्रमा निकलने का संभावित समय इस प्रकार है:
दिल्ली: रात 8:17 से 8:21 बजे तक
चंडीगढ़: रात करीब 8:18 बजे
अमृतसर: रात करीब 8:24 बजे
गाजियाबाद: रात करीब 8:16 बजे
मुंबई: रात करीब 9:00 बजे
कानपुर: रात करीब 8:05 बजे
लखनऊ: रात करीब 8:06 बजे
प्रयागराज: रात करीब 8:00 बजे
आगरा: रात करीब 8:15 बजे
पटना: रात 7:48 से 7:50 बजे तक
गुरुग्राम: रात करीब 8:22 बजे
फरीदाबाद: रात करीब 8:20 बजे
भोपाल: रात करीब 8:33 बजे
इंदौर: रात 8:30 से 8:35 बजे तक
उज्जैन: रात करीब 8:32 बजे
चंद्रमा निकलने का समय स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए चंद्रमा से संबंधित पूजा और व्रत खोलने से पहले अपने स्थानीय क्षेत्र का समय अवश्य जांच लें।
करवा चौथ की पूजा विधि: कैसे करें पूजा?
करवा चौथ की शाम की पूजा त्योहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। महिलाएं सामान्यतः इन चरणों का पालन करती हैं:
पूजा स्थल तैयार करें: किसी साफ जगह पर पूजा की व्यवस्था करें और लकड़ी की चौकी रखें।
देवी-देवताओं की स्थापना करें: चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की तस्वीरें या मूर्तियां स्थापित करें।
पूजा सामग्री रखें: पानी से भरा करवा, दीपक, रोली, चावल, फूल, मिठाई और अन्य पारंपरिक पूजा सामग्री तैयार रखें।
व्रत कथा सुनें: शाम की पूजा के दौरान करवा चौथ की कथा पढ़ें या सुनें।
आरती करें: परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा के अंत में आरती करें।
चंद्रमा को अर्घ्य दें: चंद्रमा निकलने के बाद चंद्र देव को जल अर्पित करें और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करें।
व्रत खोलें: कई परंपराओं में महिलाएं छलनी से चंद्रमा को देखती हैं और फिर अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद वे व्रत खोलती हैं। कई परिवारों में पति के हाथ से पानी पीने के बाद भोजन करने की परंपरा है।
करवा चौथ की व्रत कथा क्यों है महत्वपूर्ण?
करवा चौथ की व्रत कथा सुनना या पढ़ना इस त्योहार की पारंपरिक पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे आमतौर पर शाम की पूजा के दौरान किया जाता है। यह कथा आस्था, भक्ति और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए की जाने वाली प्रार्थनाओं से जुड़ी है।
यह कहानी पीढ़ियों से चली आ रही है और अलग-अलग क्षेत्रों में इसके विभिन्न रूप प्रचलित हैं। महिलाएं चंद्रमा के निकलने की प्रतीक्षा करने और व्रत के बाकी अनुष्ठान पूरे करने से पहले कथा सुनती हैं।
सूर्योदय से पहले सरगी: व्रत रखने वाली महिलाएं क्या खाएं?
सरगी करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले खाई जाती है। इससे महिलाएं दिनभर के व्रत की तैयारी करती हैं। परंपरागत रूप से सरगी सास की ओर से तैयार की जाती है। इसमें फल, मिठाइयां, सूखे मेवे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं।
परंपरा के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाएं चंद्रमा निकलने तक भोजन और पानी से परहेज करती हैं। हालांकि, व्रत रखते समय व्यक्तिगत स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है। गर्भवती महिलाओं, अस्वस्थ लोगों या किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को सख्त व्रत रखने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
करवा चौथ की परंपराएं: कपड़े, सोलह शृंगार और पूजा
करवा चौथ पर लाल, गुलाबी और अन्य शुभ रंगों के कपड़े पहनने की परंपरा है। कई महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनती हैं और त्योहार के अवसर पर सोलह शृंगार करती हैं। कुछ परिवारों में इस दिन काले रंग के कपड़े न पहनने की परंपरा भी है।
शाम के समय महिलाएं एक साथ पूजा करती हैं, व्रत कथा सुनती हैं और अपने पति की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं। चंद्रमा के दर्शन के बाद वे अर्घ्य देती हैं और अपने परिवार की परंपराओं के अनुसार व्रत खोलती हैं।
करवा चौथ पर ध्यान रखने वाली जरूरी बातें
परिवार की परंपरा के अनुसार सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करें।
शाम की पूजा निर्धारित शुभ मुहूर्त में करें।
पूजा के दौरान व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखें और जहां तक संभव हो, विवाद से बचें।
चंद्रमा निकलने के बाद अर्घ्य देकर परंपरा के अनुसार व्रत पूरा करें।
इच्छानुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े या अन्य आवश्यक वस्तुएं दान कर सकते हैं।
करवा चौथ धार्मिक आस्था, पारिवारिक मेल-मिलाप और वैवाहिक संबंधों के उत्सव का अवसर है। महिलाएं पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन करते हुए श्रद्धा के साथ यह व्रत रखती हैं।
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