हाईकोर्ट के आदेश पर पीजीआई चंडीगढ़ में हुआ दोबारा पोस्टमार्टम; श्मशान घाट पर तैनात रहे 300 पुलिसकर्मी
हाईकोर्ट के आदेश पर पीजीआई चंडीगढ़ में हुआ दोबारा पोस्टमार्टम; श्मशान घाट पर तैनात रहे 300 पुलिसकर्मी
खबर खास | मानसा
मानसा जिले के गांव भम्मे कलां के युवा किसान दलजीत सिंह का शव मौत के 10 दिन बाद आखिरकार शुक्रवार को उनके पैतृक गांव लाया गया, जहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। दलजीत की बहन अमरजीत कौर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत चंडीगढ़ पीजीआई से एम्बुलेंस में शव को गांव लेकर पहुंची थीं।
मामले की संवेदनशीलता और हाईकोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए पूरे गांव और श्मशान घाट को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए एसपी स्तर के अधिकारियों की निगरानी में करीब 300 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। अदालत ने अंतिम संस्कार में राजनीतिक नेताओं के शामिल होने पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। इससे पहले गुरुवार को पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने मृतक के परिवार को ₹50 लाख मुआवजा और पत्नी को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया था।
पुलिस के मुताबिक दलजीत सिंह की हत्या कर शव को सड़क किनारे फेंक दिया गया था। पुलिस का दावा है कि इस मामले में 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। शुरुआत में शव का पोस्टमार्टम एम्स बठिंडा में हुआ था, लेकिन परिवार के भीतर अंतिम संस्कार को लेकर मतभेद पैदा हो गए। दलजीत के पिता जरनैल सिंह ने धरने पर बैठी अपनी पत्नी, मां और बेटी से गांव लौटकर अंतिम संस्कार करने की अपील की थी।
इसके बाद दलजीत की बहन अमरजीत कौर ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए सीबीआई (CBI) जांच और शव सौंपने की मांग की। अदालत ने पहले पीजीआई चंडीगढ़ में पोस्टमार्टम कराने और चंडीगढ़ में ही अंतिम संस्कार का आदेश दिया था, लेकिन बाद में परिवार की अपील स्वीकार करते हुए पैतृक गांव में अंतिम संस्कार की इजाजत दे दी।
स्कूल बस स्टॉप से गायब हुआ था दलजीत
दलजीत सिंह 27 अक्टूबर की सुबह अपनी बेटी को मोटरसाइकिल पर स्कूल बस स्टॉप पर छोड़ने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। उसी दोपहर परिजनों को सूचना मिली कि उसका शव रामानंदी गांव के पास सड़क किनारे पड़ा मिला है। मृतक की पत्नी परमजीत कौर का आरोप था कि दलजीत ने नशा छोड़ दिया था, लेकिन कुछ लोगों ने उसे फोन करके बुलाया और अत्यधिक मात्रा में नशा देकर उसकी जान ले ली।
हत्यारों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर परिजनों ने शव को सिरसा-मानसा हाईवे पर रखकर चक्का जाम कर दिया था। इस दौरान परविंदर झोटा के पिता भीम सिंह और लखा सिधाना भी गांव पहुंचे और शव के साथ मानसा में विरोध स्थल की ओर बढ़ने लगे। रामदत्तावाला चौक पर नाकाबंदी के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई। इसके बाद थाना सिटी-1 पुलिस ने पुलिस कर्मियों पर हमले के आरोप में 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया और उसी शाम लखा सिधाना व मोहनजीत सिंह शेरों को गिरफ्तार कर लिया था।
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पंजाब : सभी पुलिस थानों व सरकारी स्थानों पर मौजूद लावारिस वाहन 30 दिन के भीतर हटाने के आदेश
January 18, 2026
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