हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की प्रगति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने विभिन्न लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए निरंतर दिशा-निर्देश और सहयोग प्रदान किया है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की प्रगति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने विभिन्न लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए निरंतर दिशा-निर्देश और सहयोग प्रदान किया है।
सीएम सैनी नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की प्रगति की निरंतर कर रहे निगरानी
नए आपराधिक कानूनों के तहत 82 प्रतिशत सजा दर हासिल
खबर खास, चंडीगढ़ :
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की प्रगति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने विभिन्न लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए निरंतर दिशा-निर्देश और सहयोग प्रदान किया है।
सीएम सैनी ने कहा कि इन नए कानूनों, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के क्रियान्वयन से न्याय प्रणाली में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे समस्त देश में आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और छेड़छाड़-रहित न्याय प्रदान करना सुनिश्चित होगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय में हाल ही में हुई समीक्षा में, हरियाणा के प्रयासों की सराहना की गई और सभी क्षेत्रों, यानी पुलिस, जेल, अभियोजन, फोरेंसिक और अदालतों में हुई प्रगति की प्रशंसा की गई। केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) डॉ. सुमिता मिश्रा, डीजीपी हरियाणा श्री शत्रुजीत कपूर, डीजीपी जेल मोहम्मद अकील, एडीजीपी प्रशासन श्री संजय कुमार, एआईजी प्रशासन श्री हिमांशु गर्ग, संयुक्त सचिव गृह श्रीमती राधिका सिंह और निदेशक अभियोजन श्री संजय हुड्डा उपस्थित रहे।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) राज्य भर में नए कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ नियमित रूप से समीक्षा बैठकें कर रही हैं। डॉ. मिश्रा ने कहा कि सरकार हरियाणा में नए आपराधिक कानूनों को अक्षरशः लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अदालतों के साथ जेलों की 100% मैपिंग और हरियाणा के सभी जिलों में 2000 से अधिक स्थानों पर गवाह परीक्षा के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं की स्थापना जैसे नागरिक केंद्रित प्रावधानों जैसी विभिन्न उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि मेडलीपीआर ऐप, जो चिकित्सा-कानूनी रिपोर्ट के लिए अस्पतालों और पुलिस को इलेक्ट्रॉनिक रूप से जोड़ता है, की शुरुआत हरियाणा द्वारा की गई थी और यह पिछले 12 वर्षों से राज्य में सफलतापूर्वक काम कर रहा है।
इसके अलावा, उन्होंने बताया कि नए आपराधिक कानूनों के तहत 82 प्रतिशत की उच्च सजा दर हासिल की गई है। प्ली बार्गेनिंग और अनुपस्थिति में ट्रायल के प्रावधानों को लागू किया जा रहा है और सभी कार्यक्षेत्रों में 100 प्रतिशत प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त, इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम डैशबोर्ड को CCTNS, ई-प्रॉसिक्यूशन और अन्य डिजिटल टूल्स के साथ पूरी तरह से एकीकृत किया गया है।
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