सुरंगों में फंसे 933 से अधिक मजदूर, मलबे से अवरुद्ध नदियों के कारण फिर बाढ़ का संकट
सुरंगों में फंसे 933 से अधिक मजदूर, मलबे से अवरुद्ध नदियों के कारण फिर बाढ़ का संकट
खबर खास | काठमांडू
नेपाल हाल के वर्षों की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है, जबकि 4,247 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 10,000 से अधिक लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है, जबकि कम से कम 267 लोग घायल हुए हैं। लापता लोगों की तलाश और पीड़ितों के शव बरामद करने के लिए हजारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है और कई प्रभावित जिलों में खोज व बचाव अभियान जारी है।
इस आपदा ने नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं (Hydropower Projects) के सामने भी बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि 933 जलविद्युत परियोजना कर्मचारी वर्तमान में लापता हैं। आशंका जताई जा रही है कि इनमें से कई मजदूर मिट्टी, चट्टानों और बाढ़ के मलबे से बंद हुई सुरंगों (टनल) के अंदर फंसे हो सकते हैं। प्रभावित स्थलों तक पहुँचने के लिए बचाव टीमों को कठिन इलाके, क्षतिग्रस्त सड़कों और लगातार बाढ़ के खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
रविवार को मध्य नेपाल में त्रिशूली नदी के जलस्तर में फिर से आए उफान ने भारी तबाही मचाई। गोरखा जिले के गंडकी ग्रामीण नगरपालिका-8 स्थित घ्यालचोक को पृथ्वी राजमार्ग के पास चरौदी से जोड़ने वाला एक सस्पेंशन ब्रिज (झूला पुल) बाढ़ के तेज बहाव में बह गया।
अधिकारियों के मुताबिक नदी में करीब तीन घंटे तक बाढ़ का प्रकोप जारी रहा और सुबह करीब 11:30 बजे यह पुल ढह गया। इस घटना से गंडकी ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड नंबर 7 और 8 के निवासियों का संपर्क टूट गया है और पृथ्वी राजमार्ग तक उनकी सीधी पहुँच बाधित हो गई है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि खतरा अभी टला नहीं है। भोटेकोशी नदी में बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया है, जिससे प्राकृतिक रुकावट पैदा हो गई है और झील जैसी स्थिति बन गई है।
अधिकारियों को डर है कि यदि यह प्राकृतिक बांध टूटा, तो अचानक भारी मात्रा में पानी छूटने से निचले इलाकों में फिर से विनाशकारी बाढ़ आ सकती है। आने वाले दिनों में पहले से ही अवरुद्ध नदी प्रणाली में अतिरिक्त पानी आने की संभावना ने बचाव एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
चीन ने भी तिब्बत में इसी तरह बनी एक प्राकृतिक झील को लेकर चेतावनी जारी की है। इस स्थिति से हिमालयी क्षेत्र से बहने वाली नदियों के किनारे फिर से बाढ़ आने का खतरा पैदा हो गया है।
टूटे हुए पुलों, क्षतिग्रस्त सड़कों, अस्थिर इलाके और दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण जारी राहत और बचाव अभियान बेहद जटिल हो गया है। नेपाल ने हजारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है, जबकि विशेषज्ञ टीमें उन जलविद्युत स्थलों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं जहाँ मजदूर जमीन के नीचे सुरंगों में फंसे हो सकते हैं।
यह आपदा हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ग्लेशियर और चट्टान खिसकने के कारण आई थी, जिससे नदी घाटियों में भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और मलबा बहकर आ गया और घर, पुल व अन्य बुनियादी ढांचे तबाह हो गए।
सीमा पार चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी अधिकारियों ने अब तक 16 मौतों की पुष्टि की है, जबकि 500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। वहाँ भी बचाव दल बेहद कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं।
आपदा के विशाल पैमाने को देखते हुए बड़े पैमाने पर सीमा पार बचाव प्रयास चलाए जा रहे हैं। लापता लोगों को खोजने और जलविद्युत सुरंगों में फंसे श्रमिकों तक पहुँचने के प्रयासों में नेपाली टीमों को भारतीय और चीनी विशेषज्ञों से सहायता मिल रही है।
बाढ़ का खतरा मंडराता देख प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रह रहे लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने व सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
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