मौत के मुहाने पर खड़े थे 370 स्कूली बच्चे और शिक्षक, एक अनजान शख्स की खौफनाक चीख और 5 मिनट की तेजी ने लिख दी गजब की दास्तान
मौत के मुहाने पर खड़े थे 370 स्कूली बच्चे और शिक्षक, एक अनजान शख्स की खौफनाक चीख और 5 मिनट की तेजी ने लिख दी गजब की दास्तान
ख़बर ख़ास | नेपाल
नेपाल के एक शांत और सुदूर गांव में रोजाना की तरह स्कूल की घंटियां बज रही थीं। क्लासरूम में शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे थे और बच्चे अपनी कॉपियों में भविष्य के सपने लिख रहे थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुदरत का एक खौफनाक मंजर कुछ ही मिनटों में सब कुछ तबाह करने आ रहा है। पास की पहाड़ी नदी में अचानक आए जलजले ने रौद्र रूप धारण कर लिया था। पानी का एक विशालकाय सैलाब, जो अपने साथ भारी पत्थर, पेड़ और मलबा घसीटता हुआ ला रहा था, सीधे स्कूल की इमारत की ओर तेजी से बढ़ रहा था।
इसी बीच, अचानक स्कूल के बाहर एक अनजान शख्स बदहवास हालत में दौड़ता हुआ आया। उसकी सांसें फूल रही थीं, चेहरे पर खौफ था और वह अपनी पूरी ताकत से चिल्ला रहा था—"बाढ़ आ रही है! भागो... ऊपर की तरफ भागो!" उसकी आवाज में इतना सच और इतना डर था कि स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया।
शिक्षकों ने बिना एक सेकंड गंवाए खतरे की गंभीरता को समझा। कोई सवाल-जवाब नहीं हुआ, कोई इंतजार नहीं किया गया। शिक्षकों ने तुरंत मोर्चा संभाला और मासूम बच्चों को संभालते हुए उन्हें ऊंची पहाड़ी की ओर भागने का निर्देश दिया। बड़े बच्चों ने छोटे बच्चों का हाथ थामा, तो शिक्षकों ने गोद में उठाकर कई मासूमों को दौड़ना शुरू किया।
देखते ही देखते पूरा स्कूल खाली हो गया। और ठीक उसी के 5 मिनट बाद, वही हुआ जिसका डर था। नदी का उफान मारता पानी एक भीषण गर्जना के साथ स्कूल परिसर में घुस गया। कुछ ही सेकंडों में स्कूल की दीवारें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। क्लासरूम, खेल का मैदान और बच्चों की किताबें सब कुछ मलबे और पानी की जलसमाधि में लीन हो गया।
ऊंची पहाड़ी की सुरक्षित चोटी पर खड़े होकर जब 370 बच्चों और शिक्षकों ने अपने स्कूल को जलमग्न होते देखा, तो सभी के रोंगटे खड़े हो गए। उनकी आंखों के सामने तबाही का खौफनाक मंजर था, लेकिन दिल में एक गहरा सुकून कि वे सब जिंदा थे।
लेकिन जब सबने मुड़कर उस अनजान शख्स को ढूंढने की कोशिश की, जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर चिल्ला-चिल्लाकर पूरे स्कूल को अलर्ट किया था, तो वह गायब हो चुका था। उसने ना तो किसी तारीफ का इंतजार किया और ना ही अपना नाम बताया। तबाही के उस खौफनाक मंजर में वह एक गुमनाम मसीहा बनकर आया, 370 जिंदगियों को मौत के मुंह से छीना और हवा की तरह गायब हो गया। आज भी उस गांव का हर बच्चा और शिक्षक उस अनजान फरिश्ते की सलामती की दुआ मांगता है।
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