पंजाब सरकार की अपील खारिज, समय पर भुगतान नहीं होने पर 6 प्रतिशत ब्याज देना होगा; गैर-जरूरी खर्चों पर भी कोर्ट की सख्त टिप्पणी
पंजाब सरकार की अपील खारिज, समय पर भुगतान नहीं होने पर 6 प्रतिशत ब्याज देना होगा; गैर-जरूरी खर्चों पर भी कोर्ट की सख्त टिप्पणी
चंडीगढ़, 3 अगस्त
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य के करीब छह लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते (डीए) के लंबित बकाया के भुगतान का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने इस मामले में पंजाब सरकार की अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा और सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारियों एवं पेंशनरों का बकाया डीए एक महीने के भीतर जारी किया जाए।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा के भीतर बकाया राशि का भुगतान किया जाना अनिवार्य होगा। भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंजाब के मुख्य सचिव को अदालत में हलफनामा दाखिल कर आदेश के अनुपालन की जानकारी भी देनी होगी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार एक महीने के भीतर बकाया राशि जारी करने में विफल रहती है तो कर्मचारियों और पेंशनरों को लंबित राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के वैधानिक अधिकारों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के खर्चों पर भी सख्त रुख अपनाया। अदालत ने निर्देश दिया कि कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए बकाया का भुगतान होने तक सरकार विज्ञापनों और अन्य गैर-जरूरी योजनाओं पर अनावश्यक खर्च से परहेज करे। कोर्ट ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पहले अपने कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित वित्तीय दायित्वों को पूरा करना होना चाहिए।
हाईकोर्ट के इस फैसले का कर्मचारी संगठनों और पेंशनर एसोसिएशनों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से लंबित डीए बकाया का भुगतान होने से लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों को आर्थिक राहत मिलेगी। साथ ही, यह निर्णय कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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