कांग्रेस ने मंत्रियों के इस्तीफे की मांग को लेकर किया हंगामा, मुख्यमंत्री ने परीक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल; सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक
कांग्रेस ने मंत्रियों के इस्तीफे की मांग को लेकर किया हंगामा, मुख्यमंत्री ने परीक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल; सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक
चंडीगढ़, 3 अगस्त
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन फार्मेसी परीक्षा में कथित पेपर लीक के मुद्दे पर सदन में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायकों ने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। विरोध दर्ज कराने के लिए कांग्रेस विधायक काले परने पहनकर सदन में पहुंचे, जिससे कार्यवाही बाधित हो गई।
विधानसभा अध्यक्ष ने कई बार कांग्रेस विधायकों से शांत होकर सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन विरोध जारी रहा। अध्यक्ष ने कार्रवाई की चेतावनी भी दी, इसके बावजूद हंगामा नहीं थमा और अंततः सदन की कार्यवाही दोपहर साढ़े 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक भी संबंधित विभाग के मंत्री के बारे में सही जानकारी नहीं रखते। उन्होंने विपक्ष से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की और कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान होना चाहिए।
इस दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने देशभर में नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक की घटनाओं को लेकर चिंता जताते हुए एक निंदा प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक देश में लगभग 70 परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो चुके हैं और इससे लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है।
सत्र की शुरुआत में नीट परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि भी दी गई। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार को परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। इस पर भाजपा विधायक अश्विनी शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि राज्य सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कार्रवाई कर रही है, लेकिन पंजाब सरकार को भी अपने स्तर पर ठोस कदम उठाने चाहिए।
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने सदन को बताया कि अगस्त महीने में राज्य के पांच हजार शिक्षकों को पदोन्नति दी जाएगी, जो लंबे समय बाद होने जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शिक्षा विभाग में नई भर्तियों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानसभा को संबोधित करते हुए परीक्षा में कथित पेपर लीक के मुद्दे पर भाजपा और केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि यह केवल पेपर लीक का मामला नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ धोखा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मेहनत और महंगी कोचिंग के बावजूद कई छात्रों को नुकसान उठाना पड़ता है क्योंकि प्रश्नपत्र पहले ही खरीदे और बेचे जाते हैं। उन्होंने कहा, "इसे पेपर लीक नहीं, बल्कि पेपर खरीद कहना ज्यादा उचित होगा।"
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच भाजपा शासित राज्यों में 65 पेपर लीक की घटनाएं हुईं, जबकि 2014 से अब तक देशभर में 93 परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पंजाब के 882 छात्रों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की है और यदि कथित पेपर लीक की घटनाएं नहीं होतीं तो यह संख्या एक हजार से अधिक हो सकती थी।
भगवंत मान ने कहा कि पेपर लीक देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर चुनौती है, जिसका स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें पेपर लीक मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराने की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि यदि सरकार इतनी गंभीर है तो ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने परीक्षा आयोजन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि किसी परीक्षा के लिए सुरक्षा में वायुसेना जैसी एजेंसियों की जरूरत पड़ना व्यवस्था की कमियों को दर्शाता है। साथ ही उन्होंने संसद में ई-20 ईंधन से जुड़े मुद्दे पर भी केंद्र सरकार से जवाब देने की मांग की।
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