4.50 करोड़ रुपये की लागत से पंजाब में तीन प्रयोगशालाओं का नेटवर्क तैयार; नकली जैव उर्वरकों पर रोक, किसानों को प्रमाणित उत्पाद उपलब्ध कराने और रासायनिक खादों पर निर्भरता घटाने में मिलेगी मदद
4.50 करोड़ रुपये की लागत से पंजाब में तीन प्रयोगशालाओं का नेटवर्क तैयार; नकली जैव उर्वरकों पर रोक, किसानों को प्रमाणित उत्पाद उपलब्ध कराने और रासायनिक खादों पर निर्भरता घटाने में मिलेगी मदद
खबर खास | मोहाली
पंजाब में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने और किसानों को नकली जैव उर्वरकों से बचाने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने मोहाली के एसएएस नगर स्थित कलकट भवन में राज्य की तीसरी जैव उर्वरक जांच प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इसके साथ ही 4.50 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित तीन प्रयोगशालाओं का नेटवर्क पूरा हो गया है। इससे किसानों तक प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण जैविक कृषि उत्पाद पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे पहले गुरदासपुर और बठिंडा में भी ऐसी प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं।
उद्घाटन के बाद मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि इन प्रयोगशालाओं का उद्देश्य किसानों को प्रभावी और प्रमाणित जैव उर्वरक उपलब्ध कराना तथा उन्हें नकली उत्पादों से बचाना है। उन्होंने कहा कि इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में भी सहायता मिलेगी। प्रयोगशालाएं उर्वरक नियंत्रण आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन, निर्माताओं और विक्रेताओं की निगरानी तथा पंजाब की कृषि जलवायु के अनुकूल जैव उर्वरक तैयार करने के लिए जरूरी आंकड़े जुटाने में भी भूमिका निभाएंगी।
खुड्डियां ने कहा कि पंजाब देश का प्रमुख कृषि उत्पादक राज्य है और देश के गेहूं तथा चावल उत्पादन में 30 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है। ऐसे में मिट्टी की सेहत और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। जैविक खेती गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण विकल्प है।
उन्होंने कहा कि भारत में जैविक खेती की समृद्ध परंपरा रही है, लेकिन आधुनिक कृषि में रासायनिक उत्पादों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण इसका विस्तार प्रभावित हुआ। अब खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की गुणवत्ता को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण जैविक खेती फिर महत्वपूर्ण हो रही है। वर्ष 2025-26 तक पंजाब में लगभग 30,000 एकड़ क्षेत्र प्रमाणित जैविक खेती के अंतर्गत है।
मंत्री ने बताया कि पंजाब में जैव उर्वरकों की सालाना खपत लगभग 15,000 से 16,000 मीट्रिक टन/किलोलीटर है और इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। नई प्रयोगशालाओं से उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, नकली सामग्री पर रोक लगाने और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इस अवसर पर डेरा बस्सी के विधायक कुलजीत सिंह रंधावा, कृषि विभाग के अतिरिक्त सचिव लतीफ अहमद और कृषि निदेशक गुरजीत सिंह बराड़ भी उपस्थित रहे।
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