मुख्यमंत्री भगवंत मान के विचार के लिए भेजा गया विधेयक का मसौदा; संपत्ति जब्त करने, विशेष अदालतें गठित करने और संगठित मिलावटखोरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश
मुख्यमंत्री भगवंत मान के विचार के लिए भेजा गया विधेयक का मसौदा; संपत्ति जब्त करने, विशेष अदालतें गठित करने और संगठित मिलावटखोरी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब में खाद्य पदार्थों, दवाओं और कृषि संबंधी उत्पादों में बड़े पैमाने पर मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित विधेयक के मसौदे में दोषी पाए जाने वालों के लिए तीन से सात साल तक की जेल, एक करोड़ रुपये तक जुर्माना और उनकी संपत्ति जब्त करने का प्रावधान शामिल करने की सिफारिश की गई है।
पंजाब खाद्य, फार्मा एवं कृषि सुरक्षा प्राधिकरण विधेयक-2026 का मसौदा मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के विचार के लिए भेजा गया है। इसके लेखकों ने राज्य सरकार से आगामी पंजाब विधानसभा सत्र में प्रस्तावित कानून पेश करने का आग्रह किया है। हालांकि, यह विधेयक अभी प्रस्ताव के स्तर पर है और इसे कानून का दर्जा नहीं मिला है।
इस मसौदे को सेवानिवृत्त पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू और लुधियाना के पर्यावरण कार्यकर्ता कर्नल जसजीत सिंह गिल (सेवानिवृत्त) ने तैयार किया है। इसका उद्देश्य संगठित मिलावटखोरी के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करना और मौजूदा नियामक व्यवस्था की कमियों को दूर करना है।
प्रस्तावित प्रावधानों के तहत मिलावटी सामान के मूल्य से तीन गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, दोषियों की संपत्ति जब्त करने की भी सिफारिश की गई है। बड़े पैमाने पर और संगठित तरीके से मिलावट करने से जुड़े मामलों को गैर-जमानती और गैर-शमनीय अपराध की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव है। मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए विशेष अदालतें गठित करने की सिफारिश भी की गई है।
मिलावटी खाद्य पदार्थ, नकली बीज और घटिया दवाएं निशाने पर
प्रस्तावित कानून में मिलावटी पनीर और घी, रसायनों से तैयार दूध, अफ्लाटॉक्सिन से दूषित पशु आहार, नकली कीटनाशक और बीज तथा घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं को सार्वजनिक स्वास्थ्य और किसानों के हितों के लिए गंभीर खतरा बताया गया है।
विधेयक के लेखकों के अनुसार, मिलावट का कारोबार अब संगठित गतिविधि का रूप ले चुका है। इसमें विनिर्माण इकाइयों से लेकर कई राज्यों में फैली आपूर्ति शृंखलाएं शामिल हैं।
उन्होंने मिलावट पर प्रभावी रोक लगाने में कई चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया है। इनमें स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन और औषधि नियंत्रण विभागों के बीच समन्वय की कमी, प्रयोगशालाओं में जांच में देरी और दोषसिद्धि की कम दर प्रमुख हैं।
मसौदा तैयार करने वालों ने यह चिंता भी जताई है कि बड़े पैमाने पर मिलावट करने वाले कई बार सजा से बच निकलते हैं, जबकि छोटी दुकानों और मिठाई निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई होने की आशंका अधिक रहती है।
राज्यस्तरीय प्राधिकरण और जिला इकाइयां बनाने का प्रस्ताव
विभागों के बीच समन्वय और जवाबदेही बढ़ाने के लिए मसौदे में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय प्राधिकरण गठित करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही उपायुक्त-सह-जिला मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में जिला स्तरीय इकाइयां बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
ये संस्थाएं विभिन्न विभागों की कार्रवाई में समन्वय स्थापित करेंगी और जिला स्तर पर लिए गए फैसलों की समीक्षा करेंगी। इससे मिलावटखोरी से जुड़े मामलों में अधिक व्यवस्थित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
छोटे कारोबारियों को राहत देने के भी प्रस्ताव
सख्त दंडात्मक प्रावधानों के साथ मसौदे में छोटे कारोबारियों को सुरक्षा मानकों का पालन करने में सहायता देने के उपाय भी सुझाए गए हैं।
इनमें छोटे व्यापारियों के लिए मुफ्त पंजीकरण, निर्धारित नियमों का पालन करने के लिए 60 दिन की अवधि और प्रयोगशाला में जांच के खर्च पर सरकार की ओर से 70 प्रतिशत सब्सिडी देने का प्रस्ताव शामिल है।
मसौदे में यह भी सिफारिश की गई है कि यदि किसी उत्पाद को असुरक्षित नहीं पाया जाता, तो ऐसे मामलों में अधिकतम जुर्माना 20,000 रुपये तक सीमित रखा जाए।
यदि सरकार इस विधेयक को मंजूरी देकर कानून बनाती है, तो पंजाब में संगठित मिलावटखोरी के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिक सख्त कानूनी व्यवस्था स्थापित हो सकती है। साथ ही छोटे कारोबारियों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए आर्थिक सहायता और पर्याप्त समय देने का प्रावधान भी हो सकता है।
हालांकि, कानून के अंतिम प्रावधान सरकार के विचार-विमर्श और विधायी प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।
Like
Dislike
Love
Angry
Sad
Funny
Wow
पंजाब : सभी पुलिस थानों व सरकारी स्थानों पर मौजूद लावारिस वाहन 30 दिन के भीतर हटाने के आदेश
January 18, 2026
Comments 0