वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की; आम आदमी पार्टी के विधायकों ने चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार से केंद्र की भाजपा सरकार को समर्थन देने पर सवाल उठाए।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की; आम आदमी पार्टी के विधायकों ने चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार से केंद्र की भाजपा सरकार को समर्थन देने पर सवाल उठाए।
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब सरकार ने राज्य विधानसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। इसमें मतदाता सूचियों के संशोधन के दौरान कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई। आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों को भी निशाने पर लिया और मतदाता सूचियों से पात्र लोगों के नाम काटे जाने की शिकायतों के बीच उनकी जिम्मेदारी पर सवाल उठाए।
आम आदमी पार्टी की विधायक इंदरजीत कौर ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को समर्थन जारी रखने वाले सहयोगी दलों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू और जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार का नाम लेते हुए पूछा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा का समर्थन करने वाले दल अधिक जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा रहे हैं।
इससे पहले पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने मतदाता सूचियों से पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग की।
चीमा ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की नींव समानता, न्याय और जनता की सर्वोच्चता जैसे संवैधानिक सिद्धांतों पर टिकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है और किसी भी पात्र नागरिक को गैरकानूनी तरीके से इस अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
मंत्री ने देशभर में बड़ी संख्या में नागरिकों के नाम मतदाता सूचियों से हटाए जाने की शिकायतों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ-साथ निर्वाचन आयोग की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
चीमा ने डॉ. आंबेडकर का किया उल्लेख, कमजोर वर्गों के मताधिकार पर जताई चिंता
डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान का उल्लेख करते हुए चीमा ने कहा कि स्वतंत्रता से पहले मतदान का अधिकार मुख्य रूप से समाज के विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों तक सीमित था। इनमें वकील, डॉक्टर, न्यायाधीश, शासक और धनी लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि आंबेडकर ने गरीबों और वंचित वर्गों, जिनमें दलित और अनुसूचित जातियां भी शामिल हैं, की लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चीमा ने आरोप लगाया कि मतदाताओं के नाम काटे जाने की शिकायतें गरीब और कमजोर समुदायों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा हैं। उन्होंने अधिकारियों पर अल्पसंख्यकों और दलितों को निशाना बनाने का आरोप भी लगाया। मंत्री ने कहा कि पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप
वित्त मंत्री ने कर्नाटक के राजस्व मंत्री के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि गरीब लोगों और विपक्षी दलों के समर्थकों के वोट कटवाने के लिए बूथ स्तर के अधिकारियों के सामने कथित तौर पर जाली दस्तावेज और भ्रामक दावे पेश किए जा रहे हैं।
उन्होंने दिल्ली में लगभग 40 हजार वोट कम होने की खबर का भी उल्लेख किया और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण पर चिंता जताते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का संदर्भ दिया।
चीमा ने दोहराया कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र के केंद्र में है और किसी पात्र नागरिक को गैरकानूनी तरीके से इस अधिकार से वंचित करना संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन होगा।
स्वतंत्र जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग
प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में मतदाता सूचियों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े फैसलों में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय व्यवस्था बनाने की मांग की गई।
इसमें यह भी कहा गया कि यदि जांच में किसी व्यक्ति के खिलाफ गलत काम करने के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो कानून के अनुसार आपराधिक कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए।
प्रस्ताव में केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से चुनाव प्रक्रिया की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया। साथ ही प्रस्ताव की प्रतियां आगे की कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजने की मांग की गई।
इस बीच, आम आदमी पार्टी की विधायक इंदरजीत कौर और मनुके ने दोहराया कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को समर्थन देने वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों को भी राजनीतिक रूप से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इस तरह मतदाता सूचियों को लेकर चल रहे विवाद में गठबंधन के सहयोगी दलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।
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