नई डिजिटल व्यवस्था से साइबर ठगी के मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज होगी, बैंक खाते फ्रीज करने और जांच शुरू करने में नहीं होगी देरी।
नई डिजिटल व्यवस्था से साइबर ठगी के मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज होगी, बैंक खाते फ्रीज करने और जांच शुरू करने में नहीं होगी देरी।
खबर खास | चंडीगढ़
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में पंजाब पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए ₹5 लाख या उससे अधिक की साइबर ठगी के मामलों के लिए ई-जीरो एफआईआर प्रणाली शुरू कर दी है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य साइबर अपराधों में तुरंत एफआईआर दर्ज करना, जांच में तेजी लाना और ठगी गई राशि की अधिकतम रिकवरी सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की मंशा के अनुरूप शुरू की गई इस व्यवस्था को मंगलवार को पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव द्वारा स्टैंडिंग ऑर्डर जारी किए जाने के बाद औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया।
नई प्रणाली के तहत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज होने वाली पात्र शिकायतें स्वतः ई-जीरो एफआईआर में बदल जाएंगी। इसके बाद इन्हें क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) के माध्यम से संबंधित जिला या पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन को इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेज दिया जाएगा, जिससे बिना किसी देरी के जांच शुरू की जा सके।
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि ₹1 करोड़ या उससे अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों की जांच और एफआईआर दर्ज करने की जिम्मेदारी स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, मोहाली को सौंपी जाएगी।
उन्होंने कहा कि साइबर ठगी के बाद शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। ई-जीरो एफआईआर प्रणाली के जरिए जांच अधिकारी बिना किसी प्रक्रियात्मक देरी के आरोपियों के बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट और अन्य भुगतान माध्यमों को फ्रीज कर सकेंगे, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखेंगे तथा बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वय कर ठगी गई राशि की रिकवरी के लिए तुरंत कार्रवाई करेंगे।
नई व्यवस्था के तहत पीड़ितों को ई-जीरो एफआईआर दर्ज होने की सूचना, संबंधित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, जांच अधिकारी का विवरण तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया की जानकारी भी तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी।
स्पेशल डीजीपी (साइबर क्राइम) वी. नीरजा ने कहा कि यह प्रणाली एनसीआरपी, हेल्पलाइन 1930, सीसीटीएनएस, बैंकों, वित्तीय संस्थानों, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी, जिससे साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में और अधिक प्रभावी व तेज कार्रवाई संभव होगी।
उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की घटना होने पर तुरंत हेल्पलाइन 1930 या एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि को फ्रीज करने और वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
पंजाब का स्टेट साइबर क्राइम डिवीजन पूरे राज्य में ई-जीरो एफआईआर प्रणाली के क्रियान्वयन की लगातार निगरानी करेगा, ताकि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में समय पर एफआईआर दर्ज हो, जांच तेजी से आगे बढ़े और साइबर अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
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