2025-26 में पंजाब में 5.44 लाख यूनिट रक्तदान; स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने युवाओं से नियमित रक्तदान की अपील की, स्क्रीनिंग और रक्त चढ़ाने की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
2025-26 में पंजाब में 5.44 लाख यूनिट रक्तदान; स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने युवाओं से नियमित रक्तदान की अपील की, स्क्रीनिंग और रक्त चढ़ाने की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस के अवसर पर म्यूनिसिपल भवन में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में उत्कृष्ट रक्तदाताओं, स्वैच्छिक रक्तदान संगठनों और रक्त केंद्रों को सम्मानित किया।
केंद्र सरकार के ई-रक्तकोष पोर्टल पर प्रति दस लाख आबादी पर स्वैच्छिक रक्तदान के मामले में पंजाब को देश में तीसरा स्थान मिला है। राज्य में देश में सबसे अधिक बार स्वैच्छिक रूप से रक्तदान करने वाले दोहराए गए रक्तदाताओं की संख्या भी सबसे ज्यादा है।
समारोह के दौरान डॉ. बलबीर सिंह ने पंजाब स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की विशेष स्मारिका भी जारी की। इसमें राज्य की उपलब्धियों, बेहतर कार्यप्रणालियों और स्वैच्छिक रक्तदाताओं के योगदान को उजागर किया गया है।
युवाओं से नियमित रक्तदान करने की अपील
समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने पंजाब में स्वास्थ्य और रक्त चढ़ाने की सेवाओं को मजबूत करने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। उन्होंने युवाओं, विशेष रूप से कॉलेज विद्यार्थियों से अपील की कि वे हर साल कम से कम एक बार रक्तदान करने का संकल्प लें।
नियमित रक्तदाताओं को स्वैच्छिक रक्तदान का राजदूत बनने का आह्वान करते हुए मंत्री ने कहा कि जो लोग कई बार रक्तदान कर चुके हैं, उन्हें अब अन्य लोगों, खासकर युवाओं को भी इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए ताकि लोगों की जान बचाने में मदद मिल सके।
हेपेटाइटिस-सी और रक्त की सुरक्षा पर जोर
मंत्री ने क्षेत्र में हेपेटाइटिस-सी की व्यापकता पर चिंता जताई और स्वास्थ्य विभाग को मिशन मोड में काम करते हुए पंजाब में हेपेटाइटिस-सी की पॉजिटिविटी दर को राष्ट्रीय औसत से नीचे लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कड़ी स्क्रीनिंग, व्यवस्थित निगरानी, समय पर इलाज से जोड़ने और रक्त सुरक्षा संबंधी नियमों का सख्ती से पालन करने की जरूरत पर जोर दिया।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग (एनएटी) और केमिलुमिनेसेंस इम्यूनोएसे (सीएलआईए) जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से रक्त चढ़ाने की सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत कर रही है। इन तकनीकों का उद्देश्य जांच की विंडो अवधि को कम करना और रक्त चढ़ाने के दौरान एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रमणों के फैलने के खतरे को कम करना है।
पंजाब में 5.44 लाख से ज्यादा यूनिट रक्त एकत्र
पंजाब में इस समय 198 लाइसेंस प्राप्त रक्त केंद्र हैं। इनमें 49 सरकारी, सात सैन्य और 142 निजी या ट्रस्ट द्वारा संचालित केंद्र शामिल हैं।
वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में 6,583 रक्तदान शिविरों के माध्यम से 5,44,167 यूनिट रक्त एकत्र किया गया। सरकारी रक्त केंद्रों में एकत्र की गई 1,78,382 यूनिट में से 1,77,583 यूनिट, यानी लगभग 99.6 प्रतिशत, स्वैच्छिक रक्तदाताओं द्वारा दान की गईं।
मंत्री ने रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि स्वस्थ व्यक्ति द्वारा रक्तदान करने से केवल रक्त देने की वजह से कमजोरी या शरीर में किसी तरह की कमी नहीं होती।
शीर्ष रक्तदाताओं और संगठनों को सम्मान
पीबीजी वेलफेयर क्लब, कोटकपूरा स्वैच्छिक रक्तदान संगठनों में पहले स्थान पर रहा। संगठन ने सरकारी रक्त केंद्रों को 8,933 यूनिट रक्त एकत्र कर उपलब्ध कराया।
पुरुष रक्तदाताओं में बठिंडा के सुरिंदर पाल को 149 बार रक्तदान करने के लिए सम्मानित किया गया। यह पंजाब में किसी पुरुष द्वारा सबसे अधिक बार रक्तदान करने का रिकॉर्ड है। महिला रक्तदाताओं में जालंधर की हरविंदर कौर ने 69 बार रक्तदान कर राज्य में पहला स्थान हासिल किया।
समारोह में 100 या उससे अधिक बार रक्तदान करने वाले 17 पुरुष रक्तदाताओं, 25 या उससे अधिक बार रक्तदान करने वाली 18 महिला रक्तदाताओं, चार दिव्यांग रक्तदाताओं, 12 सिंगल-डोनर प्लेटलेट एफेरेसिस रक्तदाताओं और छह स्वैच्छिक संगठनों को भी सम्मानित किया गया।
सेवानिवृत्त सिविल सर्जन डॉ. अजय बग्गा को स्वैच्छिक रक्त चढ़ाने की सेवाओं में लंबे समय तक योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया।
पटियाला और संगरूर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिले
पटियाला और संगरूर को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों के रूप में चुना गया। कम से कम रक्त यूनिट खराब होने, रक्त के विभिन्न घटकों को अलग करने की बेहतर व्यवस्था और थैलेसीमिया मरीजों के लिए समर्पित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने वाले रक्त केंद्रों को भी पुरस्कार दिए गए।
पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग और चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज को ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के क्षेत्र में नेतृत्व और अकादमिक प्रशिक्षण में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
एचआईवी नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मान
डॉ. बलबीर सिंह ने पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के एचआईवी 95-95-95 लक्ष्य के तहत महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करने वाले जिलों को भी सम्मानित किया।
पठानकोट को ‘सक्षम जिला’ के रूप में मान्यता दी गई, जबकि फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब, अमृतसर, कपूरथला, एसएएस नगर (मोहाली) और बठिंडा को ‘सुरक्षित जिले’ का खिताब दिया गया।
मंत्री ने कहा कि एड्स को समाप्त करने के पंजाब के प्रयासों में शुरुआती जांच, समय पर मरीजों को एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी से जोड़ना, इलाज से जुड़े मरीजों को बनाए रखना और लगातार वायरल लोड को दबाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव एवं पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी की परियोजना निदेशक तथा पंजाब स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की निदेशक साक्षी साहनी, स्वास्थ्य सेवाओं की निदेशक डॉ. हितिंदर कौर, अतिरिक्त परियोजना निदेशक डॉ. विशाल गर्ग, संयुक्त निदेशक बीटीएस डॉ. सुनीता देवी, संयुक्त निदेशक बीएसडी डॉ. सुखविंदर कौर, संयुक्त निदेशक सीएसटी डॉ. हरप्रीत कौर, संयुक्त निदेशक प्रिवेंशन डॉ. मीनू और संयुक्त निदेशक आईईसी पवन रेखा बेरी सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
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