85% कटाई के बाद भी नहीं थम रहा खेतों में आग का दौर; PPCB ने ठोका ₹40 लाख का जुर्माना, उत्तर भारत में हवा हुई जहरीली
85% कटाई के बाद भी नहीं थम रहा खेतों में आग का दौर; PPCB ने ठोका ₹40 लाख का जुर्माना, उत्तर भारत में हवा हुई जहरीली
खबर खास | चंडीगढ़
उत्तर भारत में छाए जहरीले धुंध और प्रदूषण के बीच पंजाब में पराली जलाने के मामले प्रशासनिक तंत्र के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। राज्य भर में अब तक पराली में आग लगाने की कुल 2,347 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 4 नवंबर तक पराली जलाने वाले उल्लंघनकर्ताओं पर कार्रवाई करते हुए ₹40.37 लाख का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया जा चुका है, जिसमें से ₹23.05 लाख की वसूली भी हो चुकी है। धान के इस कटाई सीजन में खेतों में लग रही आग पर लगाम कसना शासन और स्थानीय अधिकारियों के लिए बेहद पेचीदा साबित हो रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, सीमावर्ती जिला तरनतारन पराली जलाने में पूरे राज्य में सबसे आगे है, जहां अकेले 558 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद फिरोजपुर में 316, अमृतसर में 207, बठिंडा में 167 और संगरूर में 163 घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। वहीं पटियाला जिले में भी पराली जलाने के 110 मामले सामने आए, जिनमें से 24 जगहों पर अधिकारियों ने मौके पर पुष्टि की और ₹80,000 का जुर्माना लगाया, जिसमें से ₹35,000 की वसूली हो चुकी है। ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि राज्य के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में पाबंदी के बावजूद खेतों को आग के हवाले करने का सिलसिला लगातार जारी है।
प्रशासन की ओर से की जा रही कार्रवाई पर नजर डालें तो अब तक टीमों ने 1,942 खेतों की जमीनी जांच की, जिसमें 868 जगहों पर आग लगने का सच सामने आया। उल्लंघन पाए जाने पर 801 मामलों में जुर्माना ठोका गया। कड़े कानूनी कदम उठाते हुए राज्य भर में 647 एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं, जबकि 723 किसानों के राजस्व रिकॉर्ड (जमीन के कागजात) में 'रेड एंट्री' दर्ज की गई है। इसके अलावा 689 चेतावनी नोटिस भी जारी किए गए हैं। पटियाला में ही 21 एफआईआर दर्ज कर 10 मामलों में रेड एंट्री की गई है।
चौंकाने वाली बात यह है कि PPCB की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में धान के कुल 32.87 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में से 85.10 फीसदी फसल की कटाई पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद आग लगने की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की ओर से लगातार इंस्पेक्शन, रेड एंट्री, भारी जुर्माना और पुलिस केस जैसी सख्त कार्रवाइयां की जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर पराली जलाने की आदत पर पूरी तरह से नकेल कसना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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