2012 से राष्ट्रपति के पास लंबित है दया याचिका; केंद्र सरकार ने पंजाब की मौजूदा परिस्थितियों का हवाला देकर याचिका का विरोध किया
2012 से राष्ट्रपति के पास लंबित है दया याचिका; केंद्र सरकार ने पंजाब की मौजूदा परिस्थितियों का हवाला देकर याचिका का विरोध किया
खबर खास | चंडीगढ़
सुप्रीम कोर्ट 28 अक्टूबर को पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में मौत की सजा पाए दोषी बलवंत सिंह राजोआना की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई है। केंद्र सरकार ने पंजाब में मौजूदा परिस्थितियों का हवाला देते हुए इस याचिका का विरोध किया है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि सरकार को राजोआना की मांग पर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि पंजाब में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा फैसला लेना उचित नहीं होगा।
केंद्र सरकार के रुख के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब राजोआना की याचिका पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई की जाएगी। न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की सदस्यता वाली पीठ ने केंद्र की ओर से अपनी दलीलें तैयार करने के लिए समय मांगे जाने के बाद मामले को 28 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
राजोआना ने अपनी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग मुख्य रूप से इस आधार पर की है कि उसकी दया याचिका पर फैसला लेने में लंबे समय से देरी हो रही है। यह दया याचिका 2012 से राष्ट्रपति के समक्ष लंबित है। राजोआना की कानूनी टीम का तर्क है कि इस असाधारण देरी से उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है और इसी आधार पर फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला जाना चाहिए।
राजोआना की ओर से दया याचिका शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति ने दाखिल की थी। उसकी फांसी 31 मार्च 2012 को तय की गई थी, लेकिन निर्धारित तारीख से कुछ समय पहले ही इस पर रोक लगा दी गई थी।
2019 में केंद्र सरकार ने जानकारी दी थी कि गुरु नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व से जुड़े उपायों के तहत एक सिख कैदी की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला जा सकता है। हालांकि, राजोआना की सजा में प्रस्तावित बदलाव को अंततः लागू नहीं किया गया।
राजोआना पंजाब पुलिस का पूर्व कांस्टेबल है। उसे 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए बम विस्फोट में भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था। इस हमले में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह समेत 16 अन्य लोगों की मौत हुई थी। जांच में उसे हमले में वैकल्पिक बम हमलावर के रूप में चिन्हित किया गया था।
विशेष सीबीआई अदालत ने जुलाई 2007 में राजोआना को फांसी की सजा सुनाई थी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 2010 में इस सजा को बरकरार रखा था। वह करीब तीन दशक से हिरासत में है और इस दौरान लंबे समय तक मौत की सजा पाए कैदी के रूप में जेल में रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 2023 में उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने से इनकार कर दिया था और सक्षम प्राधिकारी को लंबित दया याचिका पर फैसला करने का निर्देश दिया था। अब होने वाली सुनवाई में राजोआना की नई याचिका पर विचार किया जाएगा, जिसमें दया याचिका पर फैसला लेने में हुई लंबी देरी के आधार पर फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई है।
Like
Dislike
Love
Angry
Sad
Funny
Wow
पंजाब : सभी पुलिस थानों व सरकारी स्थानों पर मौजूद लावारिस वाहन 30 दिन के भीतर हटाने के आदेश
January 18, 2026
Comments 0