जलालाबाद के पूर्व विधायक ने चंडीगढ़ में सुखबीर बादल की मौजूदगी में थामा अकाली दल का दामन; राजा वड़िंग के परिवार को दो टिकट देने वाले बयान से भी जुड़ा रहा विवाद
जलालाबाद के पूर्व विधायक ने चंडीगढ़ में सुखबीर बादल की मौजूदगी में थामा अकाली दल का दामन; राजा वड़िंग के परिवार को दो टिकट देने वाले बयान से भी जुड़ा रहा विवाद
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब में राजनीतिक गतिविधियों के बीच फाजिल्का जिले के जलालाबाद से पूर्व कांग्रेस विधायक रमिंदर सिंह आवला शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए हैं। चंडीगढ़ में पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें अकाली दल की सदस्यता दिलाई। इस घटनाक्रम को सीमावर्ती फिरोजपुर क्षेत्र की राजनीति में कांग्रेस और अकाली दल के बीच बदलते समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अकाली दल में शामिल होने के बाद सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा कर रमिंदर सिंह आवला का स्वागत किया। उन्होंने उन्हें जलालाबाद से कांग्रेस का वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक बताया। सुखबीर बादल ने अपने संदेश में जलालाबाद से अपने पुराने राजनीतिक जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों ने उन्हें तीन बार सेवा करने का अवसर दिया और अकाली सरकारों के कार्यकाल में यहां बड़े स्तर पर विकास कार्य हुए।
इस मौके पर अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष परमबंस सिंह बंटी रोमाणा भी मौजूद रहे। आवला के पार्टी में शामिल होने से उनके अगले राजनीतिक कदम और क्षेत्र में पार्टी की गतिविधियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
परिवार के सदस्यों को टिकट देने का मुद्दा भी रहा चर्चा में
रमिंदर सिंह आवला का कांग्रेस छोड़ना ऐसे समय हुआ है, जब पार्टी में टिकट वितरण और एक ही परिवार के सदस्यों को चुनाव लड़ाने के मुद्दे पर पहले बयानबाजी हो चुकी है। 4 अगस्त को फिरोजपुर में आयोजित एक जनसभा के दौरान पंजाब कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने परिवार के एक से अधिक सदस्यों को टिकट देने की मांग पर टिप्पणी की थी।
वड़िंग ने कहा था कि कई वरिष्ठ नेता खुद चुनाव लड़ने के साथ अपने बेटों के लिए भी टिकट चाहते हैं। उन्होंने अपने अध्यक्षीय कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा था कि एक परिवार को दो टिकट नहीं दिए जाएंगे। इसी दौरान उन्होंने सवाल किया था कि क्या पार्टी में किसी का पारिवारिक राज है। इस बयान को उस समय रमिंदर सिंह आवला से जोड़कर देखा गया था। हालांकि, आवला के अकाली दल में शामिल होने के पीछे यही कारण था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फिरोजपुर में टिकट को लेकर पहले भी सामने आ चुके हैं मतभेद
फिरोजपुर संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के भीतर उम्मीदवारों के चयन को लेकर रमिंदर सिंह आवला और शेर सिंह घुबाया के बीच मतभेद की खबरें पहले भी चर्चा में रही हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले शेर सिंह घुबाया शिरोमणि अकाली दल छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्हें फिरोजपुर से उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं ने आपत्ति जताई थी। रमिंदर सिंह आवला का नाम भी उस समय नाराज नेताओं के संदर्भ में सामने आया था। हालांकि, कांग्रेस हाईकमान ने घुबाया को लोकसभा चुनाव का टिकट दिया।
अब आवला के अकाली दल में शामिल होने के बाद जलालाबाद और फिरोजपुर क्षेत्र में उनकी आगामी राजनीतिक भूमिका पर नजर रहेगी। पंजाब की राजनीति में विभिन्न दलों के बीच संभावित गठजोड़ को लेकर चर्चाओं के बीच इस घटनाक्रम को भी देखा जा रहा है। हालांकि, आवला के पार्टी बदलने को किसी संभावित गठबंधन से जोड़ने के लिए फिलहाल ठोस आधार सामने नहीं आया है।
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