नए H-1B वीज़ा आवेदनों पर प्रस्तावित 1 लाख डॉलर का अतिरिक्त शुल्क अवैध करार, भारतीय पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों को बड़ी राहत
नए H-1B वीज़ा आवेदनों पर प्रस्तावित 1 लाख डॉलर का अतिरिक्त शुल्क अवैध करार, भारतीय पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों को बड़ी राहत
खबर खास | वॉशिंगटन
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की H-1B वीज़ा नीति को बड़ा झटका देते हुए नए H-1B वीज़ा आवेदनों पर प्रस्तावित 1,00,000 डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) के अतिरिक्त शुल्क को रद्द कर दिया है। अदालत ने फैसला सुनाया कि यह शुल्क अमेरिकी कानून के तहत अधिकृत नहीं था, इसलिए इसे लागू नहीं किया जा सकता।
बोस्टन की संघीय अदालत के जिला न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने कहा कि संघीय सरकार के पास इस तरह का शुल्क लगाने का स्पष्ट कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने माना कि यह प्रस्ताव मौजूदा आव्रजन कानूनों के अनुरूप नहीं है और इसलिए इसे अमान्य घोषित किया जाना चाहिए।
इस फैसले से अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले हजारों भारतीय इंजीनियरों, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और अन्य कुशल पेशेवरों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, उन अमेरिकी कंपनियों के लिए भी यह सकारात्मक खबर है जो विशेष तकनीकी और पेशेवर पदों को भरने के लिए विदेशी प्रतिभाओं पर निर्भर रहती हैं।
H-1B वीज़ा अमेरिका का प्रमुख कार्य वीज़ा कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से नियोक्ता प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त कर सकते हैं। भारतीय आईटी पेशेवर H-1B वीज़ा धारकों का एक बड़ा हिस्सा हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अतिरिक्त शुल्क लागू हो जाता, तो कंपनियों के लिए भर्ती की लागत में भारी वृद्धि होती और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं की नियुक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता।
यह फैसला सोमवार को बोस्टन के जिला न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने सुनाया। यह मामला 20 डेमोक्रेटिक पार्टी शासित राज्यों के अटॉर्नी जनरलों द्वारा दायर मुकदमे से जुड़ा था। याचिका में ट्रंप प्रशासन के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत सितंबर से नए H-1B वीज़ा आवेदनों पर भारी शुल्क लगाने की घोषणा की गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि प्रशासन ने अपने कानूनी अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर यह निर्णय लिया है।
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