पश्चिम बंगाल की युवा खिलाड़ी ने आर्थिक चुनौतियों को मात देकर रचा इतिहास, अहमदाबाद में आयोजित पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप में भारत के लिए दो गोल्ड मेडल जीते
पश्चिम बंगाल की युवा खिलाड़ी ने आर्थिक चुनौतियों को मात देकर रचा इतिहास, अहमदाबाद में आयोजित पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप में भारत के लिए दो गोल्ड मेडल जीते
ख़बर ख़ास | खेल
राजमिस्त्री की बेटी और पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली 20 वर्षीय रितु मंडल ने विश्व मंच पर शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। अहमदाबाद में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में रितु ने इतिहास रचते हुए भारत की पहली ऐसी खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया, जिसने एक ही विश्व योगासन चैंपियनशिप में दो गोल्ड मेडल अपने नाम किए।
रितु की सफलता का सफर संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प से भरा रहा है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उनके परिवार ने हमेशा उनके सपनों का साथ दिया। उनकी जीत के बाद जब रितु भारतीय तिरंगा ओढ़कर जश्न मना रही थीं, तब स्टेडियम में मौजूद उनके माता-पिता और बड़े भाई की आंखें गर्व और खुशी से नम हो गईं।
रितु की इस उपलब्धि के पीछे उनके बड़े भाई गौतम का भी अहम योगदान रहा है। गौतम स्वयं योगासन के खिलाड़ी रह चुके हैं और राज्य स्तर तक प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। हालांकि आर्थिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अपना खेल करियर बीच में छोड़ना पड़ा। वर्तमान में फिजियोथेरेपी की पढ़ाई पूरी कर चुके गौतम अपनी बहन को प्रशिक्षित करने और उसका मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
रितु बताती हैं कि उनके भाई ने हमेशा उन्हें बेहतर बनने के लिए प्रेरित किया है। वह कभी उनकी सफलता पर संतुष्ट नहीं होते, बल्कि हर उपलब्धि के बाद उन्हें और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करते हैं। यही कारण है कि रितु लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार कर रही हैं और बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ रही हैं।
विश्व स्तर पर चमकने से पहले रितु ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। उन्होंने चेन्नई में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स और असम में हुए खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में कांस्य पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया था।
अहमदाबाद में आयोजित विश्व योगासन चैंपियनशिप में रितु ने संतुलन, लचीलापन, शक्ति और सटीकता का शानदार प्रदर्शन करते हुए दुनिया भर के शीर्ष खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया। उनके इस प्रदर्शन ने भारत को गौरवान्वित किया और योगासन में देश की मजबूत पहचान को और मजबूती प्रदान की।
इतिहास रचने के बावजूद रितु की नजर अब और बड़े लक्ष्यों पर है। वह भविष्य में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और पदक जीतना चाहती हैं। उनका सपना है कि योगासन को एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और अंततः ओलंपिक खेलों में शामिल किया जाए। रितु का सबसे बड़ा लक्ष्य भारत के लिए ओलंपिक पदक जीतना है।
रितु अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के त्याग और समर्थन को भी देती हैं। साथ ही, गैलगोटियास यूनिवर्सिटी द्वारा दी जा रही ₹13,000 की मासिक छात्रवृत्ति ने भी उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है, जिससे वह बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपने खेल और भविष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित कर पा रही हैं। आज रितु मंडल लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं।
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