विदेशी बाजारों की मजबूती के बीच सरसों तेल-तिलहन में मामूली तेजी, सोयाबीन में नरमी और बिनौला तेल 225 रुपये प्रति क्विंटल टूटा
विदेशी बाजारों की मजबूती के बीच सरसों तेल-तिलहन में मामूली तेजी, सोयाबीन में नरमी और बिनौला तेल 225 रुपये प्रति क्विंटल टूटा
विदेशी बाजारों में मजबूती के बावजूद घरेलू तेल-तिलहन बाजार में बीते सप्ताह मिलाजुला रुख देखने को मिला। सरसों तेल-तिलहन की कीमतों में सीमित सुधार दर्ज किया गया, जबकि सोयाबीन तेल-तिलहन और बिनौला तेल गिरावट के साथ बंद हुए। लागत से नीचे बिकवाली के दबाव के चलते कच्चे पाम तेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल के भाव स्थिर रहे। वहीं, ऊंची कीमतों के कारण मांग कमजोर रहने से मूंगफली तेल-तिलहन में भी कोई खास बदलाव नहीं आया। सोमवार को अवकाश के कारण मलेशिया एक्सचेंज बंद रहेगा।
बाजार सूत्रों के मुताबिक, सरसों की आवक और उपलब्धता में कमी के चलते सप्ताह के दौरान सरसों तेल-तिलहन के भाव में मामूली तेजी रही। हालांकि, ऊंची कीमतों के कारण सरसों की खरीदारी कमजोर बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि जब तिलहन महंगा होगा तो उससे तैयार होने वाला तेल भी स्वाभाविक रूप से ऊंचे भाव पर ही बिकेगा।
सूत्रों के अनुसार, सोयाबीन के बड़े प्रसंस्करण संयंत्र किसानों से कम कीमत पर खरीद करने के उद्देश्य से बाजार भाव में लगातार बदलाव करते रहते हैं। बीते सप्ताह तेल संयंत्रों की ओर से सोयाबीन के खरीद भाव में कमी किए जाने से सोयाबीन तेल-तिलहन की कीमतों पर दबाव देखने को मिला।
हालांकि, सोयाबीन की उपलब्धता फिलहाल सीमित है और उसके तेल-रहित खल (डीओसी) की घरेलू मांग बनी हुई है। इसके बावजूद आयातक लागत से भी कम कीमत पर सोयाबीन और पाम-पामोलीन तेल की बिक्री कर रहे हैं। बाजार सूत्रों का कहना है कि ऐसी बिकवाली के कारण विदेशी बाजारों में तेजी का पूरा फायदा घरेलू बाजार को नहीं मिल पा रहा है।
मूंगफली बाजार को लेकर सूत्रों ने बताया कि सहकारी संस्था नाफेड के पास मूंगफली का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इसलिए मूंगफली के भाव में उतार-चढ़ाव काफी हद तक नाफेड की बिक्री पर निर्भर करता है। ऊंचे भाव के कारण खरीदारी कमजोर रहने से बीते सप्ताह मूंगफली तेल-तिलहन की कीमतें स्थिर बनी रहीं।
दूसरी ओर, आयातकों द्वारा लागत से कम कीमत पर पाम और पामोलीन तेल बेचे जाने के बावजूद इनके भाव में कोई खास बदलाव नहीं आया। सूत्रों के मुताबिक, आयातक अपने बैंक ऋण के साखपत्र (एलसी) को चालू रखने के लिए लगातार बिक्री करते रहते हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना रहता है।
बिनौला तेल में भी सप्ताह के दौरान गिरावट दर्ज की गई। सूत्रों ने बताया कि बिनौला की उपलब्धता कम है, लेकिन इसका रिफाइंड तेल मूंगफली तेल की तुलना में महंगा पड़ रहा है। मूंगफली तेल के भाव में बढ़ोतरी नहीं होने के कारण बिनौला तेल की मांग और कीमतों पर दबाव आया और इसके भाव में 225 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई।
बीते सप्ताह सरसों दाना 50 रुपये की मजबूती के साथ 8,300-8,350 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों तेल दादरी का भाव 100 रुपये बढ़कर 16,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी तेल के भाव में भी 15-15 रुपये का सुधार हुआ और ये क्रमशः 2,735-2,835 रुपये तथा 2,735-2,885 रुपये प्रति 15 किलो टिन पर बंद हुए।
इसके विपरीत, सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज के थोक भाव में 100-100 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। दोनों के भाव क्रमशः 6,675-6,725 रुपये और 6,525-6,625 रुपये प्रति क्विंटल रहे। दिल्ली में सोयाबीन तेल 50 रुपये घटकर 15,750 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन इंदौर तेल 100 रुपये टूटकर 15,550 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल 150 रुपये गिरकर 12,050 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
मूंगफली तिलहन का भाव 7,350-7,925 रुपये प्रति क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 17,000 रुपये प्रति क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,680-2,980 रुपये प्रति 15 किलो टिन पर स्थिर रहा।
कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का भाव भी 13,950 रुपये प्रति क्विंटल पर अपरिवर्तित रहा। पामोलीन दिल्ली 15,850 रुपये और पामोलीन एक्स-कांडला 14,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बंद हुआ। वहीं, मूंगफली तेल के भाव में तेजी नहीं आने से बिनौला तेल 225 रुपये की गिरावट के साथ 16,900 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
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