मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन पूजा की जाती है। भक्त अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए मां से आशीर्वाद मांगते हैं।
मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन पूजा की जाती है। भक्त अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए मां से आशीर्वाद मांगते हैं।
खबर खास | नई दिल्ली
शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन भक्त मां कूष्मांडा की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान मां को प्रिय भोग अर्पित किया जाता है और उनके पवित्र मंत्रों का जाप कर आशीर्वाद मांगा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता माना जाता है। उनकी पूजा करने से अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
इस दिन गहरे नीले रंग को शुभ माना जाता है। भक्त मां की पूजा करते समय इस रंग के कपड़े पहन सकते हैं।
कौन हैं मां कूष्मांडा? जानें धार्मिक महत्व
मां कूष्मांडा को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में सृष्टि की रचयिता माना जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि की रचना से पहले चारों ओर अंधकार था। मां ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की और अपनी तेजस्वी ऊर्जा से उसे प्रकाशमय बनाया।
नवरात्रि के दौरान भक्त सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना से मां कूष्मांडा की पूजा करते हैं। ऐसी भी मान्यता है कि मां अपने भक्तों को रोगों और नकारात्मक प्रभावों से बचाती हैं।
मां कूष्मांडा पूजा 2026: शुभ मुहूर्त
मां कूष्मांडा की पूजा के लिए इन शुभ समयों को ध्यान में रखा जा सकता है:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:54 बजे से 5:43 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:22 बजे से 3:09 बजे तक
अमृत काल: शाम 4:14 बजे से 5:57 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:17 बजे से 6:42 बजे तक
भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त की पुष्टि कर लें, क्योंकि अलग-अलग स्थानों पर समय में अंतर हो सकता है।
मां कूष्मांडा पूजा विधि: ऐसे करें पूजा
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा के लिए भक्त इन पारंपरिक विधियों का पालन कर सकते हैं:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा स्थल को साफ करें।
मां कूष्मांडा की मूर्ति या तस्वीर को स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें और मां को रोली या सिंदूर अर्पित करें।
यदि पहले दिन कलश स्थापना की गई थी, तो पारिवारिक परंपरा के अनुसार कलश की पूजा करें और मां के सामने दीपक जलाएं।
मां कूष्मांडा को फूल और अक्षत यानी साबुत चावल अर्पित करें।
मां को मालपुए या किसी अन्य मिठाई का भोग लगाएं।
मां के पवित्र मंत्र का जाप करें और उनकी धार्मिक कथा पढ़ें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।
पूजा के अंत में मां की आरती करें और सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य तथा समृद्धि की प्रार्थना करें।
पूजा के बाद परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें।
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा का मंत्र
शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा के मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधानुसार इस मंत्र का 11, 21, 51 या 108 बार जाप कर सकते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से की गई प्रार्थना और मंत्र जाप से मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भक्त मां से अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना करते हैं।
मां कूष्मांडा को कौन-सा भोग लगाएं?
मां कूष्मांडा की पूजा में पारंपरिक रूप से मालपुए और अन्य मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। भक्त श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित करने के बाद मां से आशीर्वाद मांगते हैं और परिवार के सदस्यों के बीच प्रसाद वितरित करते हैं।
शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित पर्व है। इस दौरान श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
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