नोएडा पुलिस की जांच में बस में कई यात्रियों के होने की जानकारी, सीसीटीवी और सुरक्षा इंतजामों पर भी उठे गंभीर सवाल
नोएडा पुलिस की जांच में बस में कई यात्रियों के होने की जानकारी, सीसीटीवी और सुरक्षा इंतजामों पर भी उठे गंभीर सवाल
चलती प्राइवेट स्लीपर बस में छात्रा से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए तथ्य सामने आ रहे हैं। दिल्ली पुलिस की ओर से घटना का स्थान नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में बताए जाने के बाद गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने बस के रूट, यात्रियों और उससे जुड़े लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की है।
नोएडा पुलिस की पूछताछ में बस के ट्रांसपोर्टर ने बताया कि घटना वाले दिन बस में कई यात्री दिल्ली जा रहे थे। इनमें से कुछ यात्री मयूर विहार के पास बस से उतर गए थे। नोएडा पुलिस ने कहा है कि इस संबंध में न तो पीड़ित पक्ष की ओर से पहले कोई जानकारी दी गई थी और न ही दिल्ली पुलिस ने इस बारे में नोएडा पुलिस से कोई सूचना साझा की थी।
जांच के दौरान सामने आया कि विश्वनाथ ट्रैवल्स की बस 4 अगस्त को गौतमबुद्ध नगर के सेक्टर-93 और चिल्ला क्षेत्र में देखी गई थी। इसके बाद बस चिल्ला के रास्ते दिल्ली की ओर रवाना हुई। एक्सप्रेसवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की शुरुआती जांच में बस के अंदर कई यात्रियों के मौजूद होने की जानकारी मिली है।
पुलिस के मुताबिक, विश्वनाथ ट्रैवल्स का मुख्य कार्यालय दिल्ली के मोरी गेट में है, जबकि छलेरा समेत कई शहरों में इसके स्थानीय कार्यालय भी हैं। घटना के बाद से संबंधित कार्यालय बंद बताया जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बस का संचालन किसके स्तर से किया जा रहा था और घटना वाले दिन बस की जिम्मेदारी किन लोगों के पास थी।
नोएडा पुलिस का कहना है कि घटना परी चौक से नोएडा के सेक्टर-63 के बीच होने की बात सामने आई है। पुलिस ने शहर की आंतरिक सड़कों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक बस सेक्टर-63 की ओर जाने वाले किसी रास्ते पर दिखाई नहीं दी है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि यदि बस में मौजूद यात्री मयूर विहार तक पहुंचे और वहां उतर गए, तो नोएडा क्षेत्र में घटना किस स्थान और किस परिस्थिति में हुई।
इस मामले ने सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े इंतजामों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्भया कांड के बाद सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा के लिए कई अनिवार्य व्यवस्थाएं लागू की गई थीं। इनमें बसों में सीसीटीवी और जीपीएस, पैनिक बटन, चालक-कंडक्टर का पुलिस सत्यापन, वर्दी पर नेम प्लेट और बस के अंदर का दृश्य बाहर से छिपाने वाले गहरे पर्दों पर रोक जैसे प्रावधान शामिल हैं।
पुलिस की शुरुआती जांच में जिस बस में घटना का आरोप लगाया गया है, उसमें सीसीटीवी कैमरे काम नहीं करने की बात सामने आई है। इसके अलावा खिड़कियों पर गहरे रंग के पर्दे लगे होने की जानकारी भी मिली है। पुलिस अब चालक और कंडक्टर के सत्यापन, यूनिफॉर्म, नेम प्लेट, पैनिक बटन, सीसीटीवी, जीपीएस और सुरक्षा से जुड़े अन्य अनिवार्य प्रावधानों की जांच कर रही है।
ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के बीच करीब 43 किलोमीटर की यात्रा के दौरान सामने आए इस मामले ने सड़क मार्ग पर निगरानी और पुलिस व्यवस्था की कमियों को भी उजागर किया है। जांच अधिकारियों ने परी चौक से कश्मीरी गेट तक पूरे रूट का मैप तैयार करना शुरू किया है। इसमें पुलिस चेक पॉइंट, बैरिकेडिंग, सीसीटीवी कैमरों और अन्य निगरानी व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच में अब तक रास्ते में दो प्रमुख चेक पॉइंट की जानकारी सामने आई है। इनमें परी चौक के पास सड़क किनारे पुलिस बूथ और भारी बैरिकेडिंग वाला क्षेत्र भी शामिल है। पुलिस बस के रास्ते में आने वाले प्रमुख चौराहों और चेक पॉइंट पर लगे कैमरों की फुटेज के जरिए उसकी आवाजाही को ट्रैक कर रही है।
मयूर विहार के पास दिल्ली-नोएडा चौराहे पर भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल सामने आए हैं। जांच के मुताबिक, वहां सड़क किनारे भारी बैरिकेडिंग तो थी, लेकिन रात के समय पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थे। चौराहे के ट्रैफिक सिग्नल पर सीसीटीवी कैमरे नहीं होने की बात भी सामने आई है। वहीं, कश्मीरी गेट पर जहां बस की यात्रा समाप्त हुई, वहां भी कोई बैरिकेडिंग या चेक पॉइंट नहीं मिला।
इसी बीच राजधानी में स्कूली छात्राओं से जुड़े तीन गंभीर मामलों पर दिल्ली महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। इनमें तीन वर्षीय नर्सरी छात्रा से कथित यौन शोषण, 16 वर्षीय किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म और 10 वर्षीय छात्रा की मौत का मामला शामिल है। आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता ने दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार को पत्र लिखकर तीनों मामलों की जांच तेजी से पूरी करने की मांग की है। साथ ही पुलिस से सात दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी गई है।
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