कर्ज और बजट वृद्धि पर मुख्यमंत्री का जवाब, विपक्ष के आंकड़ों को बताया भ्रामक हरियाणा सरकार ने 2014 के बाद कोई नया कर नहीं लगाया
कर्ज और बजट वृद्धि पर मुख्यमंत्री का जवाब, विपक्ष के आंकड़ों को बताया भ्रामक हरियाणा सरकार ने 2014 के बाद कोई नया कर नहीं लगाया
खबर खास, चंडीगढ़ :
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में बजट 2026-27 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास कार्यों को गति दे रही है।
कर्ज को लेकर श्वेत पत्र की जरूरत नहीं, सभी आंकड़े सार्वजनिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के कुछ विधायकों द्वारा यह कहा गया कि प्रदेश कर्ज में डूबा हुआ है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने बताया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय वर्ष 2014-15 में राज्य पर 96 हजार 875 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो उस समय की 4 लाख 37 हजार 145 करोड़ रुपये की जीएसडीपी का 22.16 प्रतिशत था। उस समय वित्त आयोग द्वारा ऋण लेने की अधिकतम सीमा 22.9 प्रतिशत निर्धारित की गई थी, जबकि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस सीमा से ऊपर कर्ज ले रखा था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ कांग्रेस विधायकों ने राज्य की ऋण देनदारी को लेकर भ्रामक आंकड़े प्रस्तुत किए हैं और कर्ज को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग भी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के सभी ऋण संबंधी आंकड़े सीएजी और आरबीआई की रिपोर्ट तथा राज्य के वार्षिक बजट दस्तावेजों में उपलब्ध हैं, जो सार्वजनिक रूप से देखे जा सकते हैं। इसलिए कर्ज को लेकर अलग से श्वेत पत्र जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
बजट में वास्तविक वृद्धि 8 से 9.24 प्रतिशत
सैनी ने बजट में वृद्धि को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यह कहना कि महंगाई दर को हटाने के बाद बजट में केवल 4 प्रतिशत वृद्धि हुई है, सही नहीं है। यदि वर्ष 2022-23 की कीमतों के आधार पर तुलना की जाए तो वर्ष 2025-26 का बजट अनुमान 1 लाख 93 हजार 294 करोड़ रुपये और संशोधित बजट 1 लाख 91 हजार 156 करोड़ रुपये बनता है। इसी प्रकार वर्ष 2026-27 का बजट अनुमान 2 लाख 8 हजार 831 करोड़ रुपये है। इस प्रकार वास्तविक रूप से वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान की तुलना में 8 प्रतिशत तथा संशोधित बजट की तुलना में 9.24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के कुछ विधायकों ने आय बढ़ाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं और आबकारी से संबंधित वसूली पर भी टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हरियाणा आबकारी नीति के तहत खुदरा जोनों का आवंटन ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया के माध्यम से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है, जिससे निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाले लाइसेंस धारकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-27 की आबकारी नीति के तहत 1 हजार 194 खुदरा जोनों के लिए 1 हजार 957 ई-बिड प्राप्त हुईं और 25 जुलाई 2025 को निर्धारित समय सीमा के भीतर बोली प्रक्रिया पूरी हो गई। इस प्रक्रिया के माध्यम से सरकार को खुदरा लाइसेंस शुल्क के रूप में 14 हजार 342 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.25 प्रतिशत अधिक है।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि 21 महीनों की अवधि वाली आबकारी नीति 2025-27 के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 14 हजार 64 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2026-27 में 13 हजार 152 करोड़ रुपये का राजस्व अनुमानित है। इस नीति अवधि में कुल राजस्व का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा लाइसेंस शुल्क से प्राप्त होता है। इसमें से लगभग 56 प्रतिशत राशि वित्त वर्ष 2025-26 में प्राप्त हो चुकी है तथा शेष 44 प्रतिशत राशि वित्त वर्ष 2026-27 में प्राप्त होगी।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि वर्ष 2014-15 से अब तक राज्य सरकार ने कोई नया कर नहीं लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई यह साबित कर दे कि सरकार ने कोई नया कर लगाया और उसकी वसूली नहीं हुई, तो वे स्वयं सदन के अगले सत्र में इस विषय पर आधे दिन की विशेष चर्चा कराने का अनुरोध करेंगे।
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