छह महीनों में 4.15 करोड़ रुपये की लागत से 914 मरीजों का इलाज, विशेषज्ञों ने समय पर पहचान और त्वरित उपचार पर दिया जोर
छह महीनों में 4.15 करोड़ रुपये की लागत से 914 मरीजों का इलाज, विशेषज्ञों ने समय पर पहचान और त्वरित उपचार पर दिया जोर
स्ट्रोक (ब्रेन अटैक) दुनिया भर में मृत्यु और स्थायी विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। यह बिना किसी चेतावनी के अचानक हो सकता है और कुछ ही मिनटों में व्यक्ति की जान के लिए खतरा बन सकता है। पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना ऐसे मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है, जिन्हें स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति में तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है।
स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA), पंजाब के जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 914 स्ट्रोक मरीजों का इलाज किया गया, जिस पर 4.15 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस दौरान मरीजों को आपातकालीन स्ट्रोक प्रबंधन, उन्नत सीटी और एमआरआई जांच, आईसीयू में भर्ती तथा लंबे समय तक अस्पताल में उपचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इनमें एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक के सबसे अधिक मामले सामने आए, जहां 48 मरीजों के उपचार पर 14.27 लाख रुपये खर्च हुए।
स्ट्रोक, जिसे आम भाषा में ब्रेन अटैक कहा जाता है, तब होता है जब मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह रुक जाता है या मस्तिष्क की रक्त वाहिका फट जाती है। इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार स्ट्रोक दुनिया में मृत्यु और दीर्घकालिक विकलांगता के सबसे बड़े कारणों में शामिल है। वहीं, अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) का कहना है कि समय पर उपचार मिलने से मरीज के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। साथ ही रक्तचाप, मधुमेह और अन्य जोखिम कारकों को नियंत्रित कर स्ट्रोक की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
SHA के रिकॉर्ड बताते हैं कि एक्यूट स्ट्रोक और एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक के सबसे अधिक मामलों का उपचार किया गया। हालांकि हेमरेजिक स्ट्रोक के मामले कम थे, लेकिन ऐसे मरीजों के इलाज पर अधिक खर्च आया क्योंकि इनमें सीटी स्कैन, एमआरआई, ट्रेकियोस्टॉमी, रक्त चढ़ाने और गहन चिकित्सा जैसी उन्नत चिकित्सा प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी भी मरीज के जीवनरक्षक उपचार में देरी न हो। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी स्वास्थ्य योजनाएं मरीजों को जरूरत के समय समय पर इलाज उपलब्ध कराती हैं। स्ट्रोक जैसी आपात स्थिति में हर मिनट कीमती होता है और आर्थिक सहायता मरीज के जीवन और मृत्यु के बीच अंतर साबित हो सकती है।"
लुधियाना स्थित सोबती न्यूरो सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल एवं मोहन दई ओसवाल अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन एवं स्पाइन सर्जन डॉ. हरमन सोबती ने कहा कि स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सीय आपातकाल है, जिसमें समय पर पहचान और उपचार सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि आधुनिक इमेजिंग तकनीक, गहन निगरानी और त्वरित चिकित्सा हस्तक्षेप से मरीजों के ठीक होने की संभावना में उल्लेखनीय सुधार आया है।
डॉ. सोबती ने लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति में अचानक शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, चेहरे का टेढ़ा होना या बोलने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अस्पताल पहुंचें। उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में इस्केमिक स्ट्रोक देखने को मिलता है और इसका इलाज कई परिवारों के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ सकता है। ऐसे में मुख्यमंत्री सेहत योजना मरीजों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच का काम कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उच्च रक्तचाप और मधुमेह को नियंत्रित रखना तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाना ही स्ट्रोक से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
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