15 सितंबर से नया नियम लागू, अब 2,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी रखने पर रोक; जमाखोरी और सट्टेबाजी पर लगाम लगाने की तैयारी
15 सितंबर से नया नियम लागू, अब 2,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी रखने पर रोक; जमाखोरी और सट्टेबाजी पर लगाम लगाने की तैयारी
त्योहारों के सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चीनी डीलरों और थोक विक्रेताओं के लिए अधिकतम स्टॉक सीमा को आधा कर दिया है। इस फैसले का मकसद बाजार में जमाखोरी रोकना, चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाना है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 63.28 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। पिछले साल इसी अवधि में यह कीमत 46.02 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यानी एक साल में खुदरा कीमत करीब 37 प्रतिशत बढ़ चुकी है। वहीं, थोक कीमत भी सालाना आधार पर 36.28 प्रतिशत बढ़कर 58.40 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
कीमतों में इस बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी है। खाद्य मंत्रालय के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक यह व्यवस्था 15 सितंबर से लागू होगी और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। नए नियम के तहत देश में कोई भी डीलर एक समय में 2,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा।
इसके साथ ही डीलरों के लिए यह भी अनिवार्य किया गया है कि खरीदी गई चीनी को प्राप्ति की तारीख से 30 दिनों से ज्यादा समय तक अपने पास न रखें। सरकार का उद्देश्य बाजार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और सट्टेबाजी या कृत्रिम तरीके से कीमत बढ़ाने की कोशिशों पर रोक लगाना है।
हालांकि, पश्चिम बंगाल के कोलकाता और इसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र को इस नियम में विशेष छूट दी गई है। यहां पहले की तरह 4,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा लागू रहेगी। खाद्य मंत्रालय के मुताबिक कोलकाता अपनी चीनी की जरूरत के लिए मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र पर निर्भर है। इसके अलावा यह पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के कई राज्यों के लिए चीनी आपूर्ति का प्रमुख केंद्र भी है। इसी वजह से कोलकाता को नई सीमा से बाहर रखा गया है।
सरकार का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और मौजूदा परिस्थितियों में जमाखोरी के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, विपणन वर्ष 2025-26 के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है। इसके बावजूद यह उत्पादन देश की अनुमानित घरेलू मांग 280 से 285 लाख टन के मुकाबले अधिक है।
वहीं, मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में कुछ राहत देखने को मिली है। महाराष्ट्र में एक्स-मिल कीमतें 18 अगस्त को करीब 67 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं, जो 1 सितंबर तक घटकर लगभग 45-46 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई हैं। सरकार को उम्मीद है कि थोक बाजार में उठाए गए इस कदम का असर जल्द ही खुदरा कीमतों पर भी दिखाई देगा और त्योहारों के दौरान आम लोगों को महंगी चीनी से कुछ राहत मिल सकेगी।
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