एसजीपीसी ने तैयार किया सालभर के कार्यक्रमों का खाका; 18 फरवरी को अमृतसर और 19-20 फरवरी 2027 को तख्त श्री केशगढ़ साहिब में मुख्य समारोह, देशभर में होंगे सेमिनार और गुरमत समागम
एसजीपीसी ने तैयार किया सालभर के कार्यक्रमों का खाका; 18 फरवरी को अमृतसर और 19-20 फरवरी 2027 को तख्त श्री केशगढ़ साहिब में मुख्य समारोह, देशभर में होंगे सेमिनार और गुरमत समागम
खबर खास | अमृतसर
भगत रविदास जी की 650वीं जन्म शताब्दी को समर्पित समारोहों की शुरुआत से लेकर मुख्य आयोजन तक के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने व्यापक कार्यक्रम तैयार किया है। इसके तहत 18 फरवरी 2027 को अमृतसर स्थित गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा, जबकि शताब्दी का मुख्य कार्यक्रम 19 और 20 फरवरी 2027 को तख्त श्री केशगढ़ साहिब, श्री आनंदपुर साहिब में होगा। इन आयोजनों के जरिए भगत रविदास जी के जीवन, उनकी वाणी, दर्शन और सामाजिक संदेश को देशभर में पहुंचाने की योजना बनाई गई है। कार्यक्रमों का यह खाका एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की अगुवाई में हुई सब-कमेटी की बैठक में तय किया गया।
बैठक के बाद एडवोकेट धामी ने बताया कि शताब्दी को समर्पित देश के अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों में सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य भगत रविदास जी के जीवन, विचारों और गुरबाणी में उनके योगदान पर चर्चा करना है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पहला सेमिनार 12 नवंबर को बब्बर अकाली मेमोरियल खालसा कॉलेज, गढ़शंकर में होगा। इसके बाद 21 नवंबर को माता गुजरी खालसा कॉलेज, करतारपुर, 26 नवंबर को गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर और 5 दिसंबर को श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी, श्री फतेहगढ़ साहिब में सेमिनार आयोजित किए जाएंगे।
इसी कड़ी में 12 दिसंबर को गुरु नानक कॉलेज, बुडलाडा और 15 दिसंबर को पंथ रतन जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन सिखिज्म, बहादुरगढ़, पटियाला में भी विचार गोष्ठियां होंगी। 4 जनवरी को गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज, लुधियाना में सेमिनार प्रस्तावित है। इसके अलावा दिल्ली और हरियाणा में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि शताब्दी का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंच सके।
शताब्दी समारोहों के तहत विभिन्न ऐतिहासिक गुरुद्वारों में गुरमत समागम और कीर्तन दरबार भी सजाए जाएंगे। इसकी शुरुआत 14 नवंबर को गुरुद्वारा श्री बेर साहिब, सुल्तानपुर लोधी से होगी। 21 नवंबर को गुरुद्वारा श्री गरना साहिब, बोदल, होशियारपुर और 28 नवंबर को गुरुद्वारा श्री चरणकंवल साहिब, बंगा में कार्यक्रम होंगे। 5 दिसंबर को गुरुद्वारा संग जी, ढेसियां, जालंधर में गुरमत समागम और कीर्तन दरबार आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा लुधियाना, मोहाली, बरनाला, तलवंडी साबो, बटाला और फिरोजपुर के विभिन्न गुरुद्वारों के साथ हिमाचल प्रदेश की सकीट मंडी में भी धार्मिक कार्यक्रम होंगे।
इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण 20 जनवरी 2027 को भगत रविदास जी की जन्मभूमि काशी (वाराणसी) से शुरू होने वाला विशाल नगर कीर्तन होगा। काशी में गुरमत समागम के बाद नगर कीर्तन रवाना किया जाएगा, जिसका समापन श्री आनंदपुर साहिब में होगा। एसजीपीसी की ओर से भगत रविदास जी के जीवन और इतिहास पर अलग-अलग भाषाओं में पुस्तिकाएं प्रकाशित करने की भी योजना है। इसके साथ ही गुरमत प्रकाश पत्रिका का फरवरी अंक उनके जीवन को समर्पित रहेगा और विशेष स्मारिका भी प्रकाशित की जाएगी। एडवोकेट धामी ने बताया कि शताब्दी समारोहों को व्यवस्थित और सफल बनाने के लिए जल्द ही अलग-अलग कमेटियों का गठन किया जाएगा।
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