पंजाब कला परिषद ने गुरमत और सिख दर्शन के प्रचार-प्रसार में आजीवन योगदान के लिए किया चयन, पद्मश्री डॉ. रतन सिंह जग्गी की स्मृति में स्थापित सम्मान के साथ मिलेंगे ₹51,000
पंजाब कला परिषद ने गुरमत और सिख दर्शन के प्रचार-प्रसार में आजीवन योगदान के लिए किया चयन, पद्मश्री डॉ. रतन सिंह जग्गी की स्मृति में स्थापित सम्मान के साथ मिलेंगे ₹51,000
ख़बर ख़ास | चंडीगढ़
पंजाब कला परिषद ने पद्मश्री डॉ. रतन सिंह जग्गी मेमोरियल चैरिटेबल फाउंडेशन के सहयोग से पूर्व राज्यसभा सांसद सरदार तरलोचन सिंह को पहले 'गुरमत रतन' स्मृति सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की है। गुरमत सिद्धांतों और सिख दर्शन के प्रचार-प्रसार में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस वार्षिक सम्मान के तहत ₹51,000 की नकद राशि, शॉल और स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाएगा।
इस सम्मान के लिए गठित चयन समिति में डॉ. बलकार सिंह, डॉ. निवेदिता सिंह, डॉ. आतम रंधावा और मलविंदर सिंह जग्गी शामिल थे। समिति ने गुरमत के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने और देश-विदेश में सिख दर्शन के संदेश का व्यापक प्रचार करने में सरदार तरलोचन सिंह के दशकों लंबे योगदान को देखते हुए उनका चयन किया।
सरदार तरलोचन सिंह एक प्रतिष्ठित सिख नेता, समाजसेवी और शिक्षाविद हैं। वह 2004 से 2010 तक राज्यसभा सांसद रहे। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा, सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। सिख विरासत के संरक्षण, शिक्षा के प्रसार और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के लिए उनके प्रयासों को देशभर में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।
इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. रतन सिंह जग्गी की समृद्ध साहित्यिक और वैचारिक विरासत को भी याद किया गया। उनके पुत्र मलविंदर सिंह जग्गी के नेतृत्व में फाउंडेशन द्वारा पंजाब कला परिषद के ओपन एयर थिएटर का नवीनीकरण भी कराया जा रहा है। परिषद ने घोषणा की है कि यह सम्मान अब हर वर्ष गुरमत सिद्धांतों के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले किसी एक व्यक्तित्व को प्रदान किया जाएगा।
डॉ. रतन सिंह जग्गी को पंजाबी, हिंदी, गुरमत और भक्ति साहित्य का अग्रणी विद्वान माना जाता है। उन्होंने अपना पूरा जीवन मध्यकालीन साहित्य, सिख गुरुओं की वाणी और भक्ति आंदोलन पर शोध एवं लेखन को समर्पित किया। उनकी प्रमुख कृतियों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब और श्री दशम ग्रंथ साहिब की विस्तृत टीकाएं, श्री गुरु ग्रंथ साहिब विश्वकोश, सिख पंथ विश्वकोश, तुलसी रामायण का पंजाबी अनुवाद तथा लगभग 150 से अधिक पुस्तकें शामिल हैं।
साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें 2023 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें साहित्य अकादमी राष्ट्रीय पुरस्कार, पंजाबी साहित्य शिरोमणि पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मानों से भी नवाजा गया। 'गुरमत रतन' स्मृति सम्मान के माध्यम से पंजाब कला परिषद न केवल डॉ. रतन सिंह जग्गी की अमूल्य साहित्यिक विरासत को जीवंत बनाए रखेगी, बल्कि गुरमत और सिख मूल्यों के प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को भी सम्मानित करती रहेगी।
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