सरकार की साइबर क्राइम यूनिट ने फर्जी क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड, क्रेडिट लिमिट बढ़ाने और बैंकिंग सेवाओं के नाम पर लोगों की संवेदनशील वित्तीय और निजी जानकारी चुराने वाले प्लेटफॉर्म की शिकायत की थी।
सरकार की साइबर क्राइम यूनिट ने फर्जी क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड, क्रेडिट लिमिट बढ़ाने और बैंकिंग सेवाओं के नाम पर लोगों की संवेदनशील वित्तीय और निजी जानकारी चुराने वाले प्लेटफॉर्म की शिकायत की थी।
खबर खास | चंडीगढ़
गूगल ने कई ऐसे फायरबेस अकाउंट और उनसे जुड़े वेबसाइटों को हटा दिया है, जिनका कथित तौर पर साइबर अपराधी फर्जी वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे। इन प्लेटफॉर्म के जरिए सरकारी और निजी बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों की नकल कर ग्राहकों को ठगी का शिकार बनाने का आरोप है।
यह कार्रवाई केंद्र सरकार की ओर से फर्जी प्लेटफॉर्म की जानकारी गूगल को दिए जाने के बाद की गई। इन वेबसाइटों पर लोगों को क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड प्वाइंट्स, क्रेडिट लिमिट बढ़ाने और अन्य बैंकिंग सेवाओं से जुड़े आकर्षक ऑफर देकर फंसाने का आरोप है।
गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने गूगल को उन वेबसाइटों और डेटाबेस के संबंध में नोटिस भेजा, जिनके जरिए प्रमुख बैंकों की आधिकारिक वेबसाइटों की नकल किए जाने की बात सामने आई थी।
सूत्रों के मुताबिक, कथित तौर पर इन फर्जी वेबसाइटों को गूगल की फायरबेस सेवा पर होस्ट किया गया था। साइबर अपराधियों ने फायरबेस के जरिए ऐसी वेबसाइट और एप्लिकेशन तैयार किए, जो देखने में वास्तविक बैंकिंग प्लेटफॉर्म जैसे दिखाई देते थे।
कथित ठग लोगों को क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड प्वाइंट्स भुनाने और क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने जैसे ऑफर देकर इन प्लेटफॉर्म तक पहुंचाते थे। इसके बाद उपयोगकर्ताओं से लॉगिन विवरण, बैंकिंग जानकारी, कार्ड की जानकारी और अन्य निजी डेटा दर्ज करने के लिए कहा जाता था।
फर्जी वेबसाइटों को इस तरह तैयार किया गया था कि वे असली बैंकिंग वेबसाइटों जैसी नजर आएं। इससे लोगों के लिए असली और नकली प्लेटफॉर्म में अंतर करना मुश्किल हो सकता था।
फायरबेस के कथित दुरुपयोग का मामला रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के बाद व्यापक चर्चा में आया था। रिपोर्ट में गूगल के क्लाउड ढांचे और फायरबेस सेवाओं के कथित रूप से धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने पर प्रकाश डाला गया था।
फायरबेस एक वैध तकनीकी विकास मंच है, जिसका इस्तेमाल मोबाइल एप्लिकेशन और वेबसाइट बनाने तथा उनके बैकएंड को संचालित करने के लिए बड़े स्तर पर किया जाता है। हालांकि, आरोप है कि साइबर अपराधियों ने इसी ढांचे का इस्तेमाल फर्जी बैंकिंग प्लेटफॉर्म तैयार करने के लिए किया।
सरकार की शिकायत पर प्रतिक्रिया देते हुए गूगल के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी की नीतियां फिशिंग, हानिकारक सॉफ्टवेयर और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए उसकी सेवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगाती हैं।
गूगल ने कहा कि वह उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और भारत में आई4सी सहित कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा सरकारी विभागों के साथ सहयोग करता है। कंपनी के मुताबिक, सरकारी नोटिस की तय प्रक्रिया के तहत समीक्षा की जाती है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाती है।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब भारत में साइबर और डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में तेजी देखी जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में साइबर धोखाधड़ी के कारण करीब 52,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
साल 2025 में ही डिजिटल और साइबर धोखाधड़ी से करीब 22,500 करोड़ रुपये के नुकसान की बात सामने आई है। इस दौरान साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी करीब 28 लाख शिकायतें दर्ज की गईं।
गूगल की ताजा कार्रवाई से साफ है कि सरकारी एजेंसियां और तकनीकी कंपनियां मिलकर साइबर अपराधियों द्वारा बैंकों की नकल करने और ग्राहकों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे डिजिटल ढांचे पर कार्रवाई तेज कर रही हैं।
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