आईएमडी के अनुसार कमजोर नमी और वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण केरल में मानसून की रफ्तार थमी; ईसीएमडब्ल्यूएफ ने दक्षिण, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में व्यापक बारिश की संभावना जताई
आईएमडी के अनुसार कमजोर नमी और वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण केरल में मानसून की रफ्तार थमी; ईसीएमडब्ल्यूएफ ने दक्षिण, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में व्यापक बारिश की संभावना जताई
खबर खास | नई दिल्ली
देश के लगभग 80–90 फीसदी हिस्से इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं, लेकिन 29 मई से 5 जून के बीच लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय मौसम मॉडल के अनुसार इस दौरान देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून बारिश होने की संभावना है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून अभी तक केरल में आगे नहीं बढ़ पाया है। मानसून की आधिकारिक एंट्री तब मानी जाती है जब केरल के 14 निर्धारित मौसम केंद्रों पर लगातार दो दिनों तक कम से कम 2.5 मिमी बारिश दर्ज हो। पहले अनुमान लगाया गया था कि मानसून 26 मई तक केरल पहुंच जाएगा, लेकिन कमजोर नमी की स्थिति के कारण इसकी प्रगति रुक गई है।
मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि दक्षिण-मध्य अरब सागर के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण बादल बनने की प्रक्रिया कमजोर हुई है, जिससे मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
वहीं, यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स (ईसीएमडब्ल्यूएफ) ने उपग्रह, समुद्री और वायुमंडलीय आंकड़ों के आधार पर 15 दिन का पूर्वानुमान जारी किया है। इस मॉडल के अनुसार अगले आठ दिनों में दक्षिण भारत, पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर भारत और बंगाल की खाड़ी से जुड़े क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्री-मानसून बारिश का यह दौर देश के बड़े हिस्सों में तापमान में अस्थायी गिरावट ला सकता है और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि, केरल में मानसून की सटीक एंट्री को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।
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