तीन बार की गोल्ड मेडलिस्ट ज्योति बोलीं- हर तीर पर फोकस, नतीजे की चिंता नहीं; नई टीम के साथ आखिरी तीर तक लड़ने का भरोसा
तीन बार की गोल्ड मेडलिस्ट ज्योति बोलीं- हर तीर पर फोकस, नतीजे की चिंता नहीं; नई टीम के साथ आखिरी तीर तक लड़ने का भरोसा
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2022 एशियन गेम्स में तीन गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली भारत की स्टार कंपाउंड तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम अब अपने चौथे एशियन गेम्स अभियान के लिए तैयार हैं। 19 सितंबर से शुरू होने वाले एशियन गेम्स में ज्योति इस बार स्कोर या नतीजे के दबाव के बजाय अपने प्रदर्शन पर पूरा ध्यान देना चाहती हैं। उनका कहना है कि अगर वह आत्मविश्वास के साथ हर शॉट को सही तरीके से अंजाम देती हैं, तो अच्छे स्कोर और नतीजे अपने आप सामने आएंगे।
ज्योति भारतीय तीरंदाजी की नई टीम का अहम हिस्सा होंगी। इस बार कई बड़े नाम एशियन गेम्स में नजर नहीं आएंगे। दीपिका कुमारी और अतनु दास की जोड़ी, अभिषेक वर्मा और ओजस प्रवीण देवताले जैसे स्थापित खिलाड़ी इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता से बाहर हैं। ऐसे में भारतीय कंपाउंड टीम की जिम्मेदारी ज्योति के कंधों पर भी होगी।
ज्योति ने अपने पिछले तीन एशियन गेम्स में लगातार पदक जीते हैं। 2014 और 2018 में उन्होंने एक-एक ब्रॉन्ज और सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। इसके बाद हांगझोउ में 2022 एशियन गेम्स में उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने व्यक्तिगत, टीम और मिक्स्ड इवेंट में तीन गोल्ड मेडल जीतकर अपना दबदबा कायम किया।
पुराने रिकॉर्ड का दबाव नहीं लेना चाहतीं ज्योति
चौथे एशियन गेम्स में उतरने से पहले ज्योति पिछली सफलताओं के दबाव को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहतीं। उन्होंने कहा कि टीम कड़ी मेहनत कर रही है और इस समय उनका पूरा ध्यान खुद के प्रदर्शन पर है। ज्योति के मुताबिक उनका लक्ष्य स्कोर या नतीजे का पीछा करना नहीं, बल्कि हर शॉट को बेहतरीन तरीके से अंजाम देना है।
नई टीम के साथ मजबूत हुई बॉन्डिंग
महिला कंपाउंड टीम में ज्योति के साथ परनीत कौर, चिकिता तानिपार्थी और पृथिका प्रदीप शामिल हैं। ज्योति ने बताया कि मई में एशियन गेम्स के लिए टीम का चयन होने के बाद से खिलाड़ियों के बीच तालमेल लगातार बेहतर हुआ है। टीम के सदस्यों के बीच मजबूत बॉन्डिंग बनी है और सभी एक-दूसरे का हर परिस्थिति में साथ देने के लिए तैयार हैं।
ज्योति का कहना है कि टीम गेम्स में उनका लक्ष्य आखिरी तीर तक संघर्ष करना और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाना रहेगा। उनका मानना है कि मजबूत टीम बॉन्डिंग दबाव वाले मुकाबलों में बड़ा फर्क पैदा कर सकती है।
नजर एशियन गेम्स पर, ओलंपिक बाद में
कंपाउंड तीरंदाजी के ओलंपिक में शामिल होने के बाद ज्योति को लॉस एंजिल्स 2028 के लिए भारत की बड़ी दावेदारों में माना जा रहा है। हालांकि, फिलहाल उनका ध्यान ओलंपिक की बजाय एशियन गेम्स पर है। 30 वर्षीय ज्योति का कहना है कि उन्हें पता है कि आगे ओलंपिक लक्ष्य है, लेकिन वह भविष्य के बारे में ज्यादा सोचकर मौजूदा पल का दबाव नहीं बढ़ाना चाहतीं।
उनका फोकस साफ है- एशियन गेम्स में हर मौके का पूरा फायदा उठाना, हर शॉट पर भरोसा रखना और बाद में किसी तरह का पछतावा न रह जाए, इसके लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना। तीन गोल्ड की पिछली सफलता के बाद अब ज्योति की नजर एक बार फिर अपने प्रदर्शन को शीर्ष स्तर तक पहुंचाने पर है।
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