2019 में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की मुख्य आरोपियों में शामिल अबाम देवी पिछले साल जमानत पर बाहर आई थी; बार-बार समन के बावजूद कोर्ट में पेश नहीं हुई, पुलिस ने तलाश तेज की
2019 में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की मुख्य आरोपियों में शामिल अबाम देवी पिछले साल जमानत पर बाहर आई थी; बार-बार समन के बावजूद कोर्ट में पेश नहीं हुई, पुलिस ने तलाश तेज की
खबर खास | चंडीगढ़
चंडीगढ़ स्थित पीजीआईएमईआर में वर्ष 2019 में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की प्रमुख आरोपियों में शामिल अबाम देवी के खिलाफ कोर्ट ने सख्त कार्रवाई की है। लगातार अदालत में पेश न होने के कारण कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी है और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए उसकी तलाश तेज कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, अबाम देवी कई वर्षों तक बुड़ैल जेल में बंद रही थी। पिछले साल उसे जमानत मिली थी। जमानत की शर्तों के तहत उसे नियमित रूप से अदालत की सुनवाई में उपस्थित होना जरूरी था। लेकिन कई बार समन जारी होने के बावजूद वह कोर्ट में पेश नहीं हुई। पिछले सप्ताह हुई सुनवाई के दौरान भी उसकी गैरमौजूदगी पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जमानत रद्द कर दी और गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया।
पुलिस की टीमें अब उसके संभावित ठिकानों और परिचित स्थानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का प्रयास है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश किया जाए।
जांच के दौरान अबाम देवी को इस कथित किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की अहम सदस्य बताया गया था। जांच में सामने आया था कि नेटवर्क से जुड़ने से पहले उसने कथित तौर पर अपनी ही एक किडनी 2.5 लाख रुपये में बेची थी। इसके बाद वह कथित रूप से रैकेट के लिए काम करने लगी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अबाम देवी ने मणिपुर की एक महिला को नौकरी दिलाने का झांसा देकर चंडीगढ़ बुलाया था। आरोप है कि चंडीगढ़ पहुंचने के बाद महिला को अवैध किडनी ट्रांसप्लांट की योजना में फंसाया गया। पुलिस के मुताबिक, ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे और इस साजिश में भूमिका निभाने के बदले अबाम देवी को कथित तौर पर 2.5 लाख रुपये मिले थे।
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि रैकेट के सदस्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाते थे। उन्हें पैसों के बदले किडनी देने के लिए तैयार किया जाता था और दूसरी ओर किडनी की जरूरत वाले मरीजों से बड़ी रकम वसूली जाती थी। कथित गिरोह दूरदराज के इलाकों से संभावित डोनर तलाशकर उन्हें नौकरी या आर्थिक मदद का लालच देकर चंडीगढ़ लाता था।
जांच के दौरान फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाने के आरोप भी सामने आए। मणिपुर के बिमल नामक व्यक्ति को भी कथित तौर पर किडनी ट्रांसप्लांट के लिए तैयार किए जाने का मामला सामने आया था, जिसमें ऑपरेशन से पहले रकम और बाद में अतिरिक्त भुगतान का कथित समझौता था।
रैकेट का खुलासा होने के बाद पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी। कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कुछ के अभी भी फरार होने की बात सामने आई है। मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी है और पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।
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