99.56 प्रतिशत कवरेज के साथ सर्वेक्षण लगभग पूरा; आंकड़ों के आधार पर राज्य में नशा विरोधी नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं को नई दिशा मिलेगी।
99.56 प्रतिशत कवरेज के साथ सर्वेक्षण लगभग पूरा; आंकड़ों के आधार पर राज्य में नशा विरोधी नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं को नई दिशा मिलेगी।
खबर खास | मोहाली
पंजाब में नशे की समस्या और इसके परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के लिए शुरू की गई राज्य की पहली नशा एवं सामाजिक-आर्थिक जनगणना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। सरकार ने राज्य के कुल 55.61 लाख परिवारों में से 55.36 लाख परिवारों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। इसके साथ ही सर्वेक्षण की कवरेज 99.56 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, करीब 3.48 लाख परिवारों ने सर्वेक्षण में शामिल होने से इनकार किया या सर्वेक्षण टीमों के साथ सहयोग नहीं किया। आंकड़ों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए 51.88 लाख सर्वेक्षणों की कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित गुणवत्ता जांच की गई। इनमें से 44.63 लाख सर्वेक्षणों को मंजूरी दे दी गई, जबकि 7.24 लाख सर्वेक्षण, यानी करीब 13.96 प्रतिशत, को मैनुअल जांच के लिए चिन्हित किया गया है।
जिला स्तर के आंकड़ों में अमृतसर ने अपने निर्धारित लक्ष्य को पार कर लिया है। यहां 4,75,079 के लक्ष्य के मुकाबले 4,80,030 परिवारों का सर्वेक्षण किया गया, जो 101.04 प्रतिशत कवरेज है। मानसा, तरनतारन, संगरूर और फिरोजपुर ने भी 100 प्रतिशत से अधिक कवरेज हासिल की है। फाजिल्का, मोगा और पठानकोट ने अपने निर्धारित लक्ष्य पूरे कर लिए हैं।
वहीं फरीदकोट में सबसे कम 95.32 प्रतिशत कवरेज दर्ज की गई। इसके बाद एसएएस नगर में 98.04 प्रतिशत, रूपनगर में 98.13 प्रतिशत और लुधियाना में 98.15 प्रतिशत कवरेज रही। पूर्ण संख्या के लिहाज से लुधियाना में सबसे अधिक परिवार सर्वेक्षण से बाहर रहे। जिले में 6,58,844 परिवारों के लक्ष्य के मुकाबले 6,46,634 परिवारों का सर्वेक्षण हुआ, जिससे 12,210 परिवारों का सर्वेक्षण बाकी रह गया।
अप्रैल में शुरू की गई इस जनगणना में करीब 28,000 सरकारी कर्मचारियों को लगाया गया था। सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल नशे से प्रभावित लोगों की पहचान करना नहीं था, बल्कि नशे की प्रकृति, नशे के सेवन की अवधि, उपचार की स्थिति और नशा मुक्ति केंद्रों तक पहुंच से जुड़ी जानकारी भी जुटाई गई।
इसके साथ ही परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति से संबंधित आंकड़े भी एकत्र किए गए। इनमें शिक्षा, रोजगार, आय, जमीन का स्वामित्व, कर्ज, पलायन और विदेश जाने की इच्छा जैसे विषय शामिल हैं।
सर्वेक्षण में जाति और उपजाति से जुड़े सवाल भी शामिल किए गए। इसके अलावा सरकारी सेवाओं, स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, धार्मिक स्थलों और पानी के स्रोतों तक पहुंच के दौरान भेदभाव के अनुभवों से संबंधित जानकारी भी मांगी गई। विपक्षी दलों ने इतने व्यापक सवाल शामिल किए जाने पर सरकार की आलोचना की थी। उनका आरोप था कि सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और जनभावनाओं से जुड़ा आंकड़ा जुटा रही है।
अब सरकार सर्वेक्षण से जुटाए गए आंकड़ों को एकत्र कर उनका विस्तृत विश्लेषण करेगी। इसके लिए मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जिसमें संबंधित विभागों के सचिव सदस्य होंगे।
यह समिति राज्य में नशे के मौजूदा रुझानों, प्रभावित क्षेत्रों, नशे के सेवन के पैटर्न और प्रभावित परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अध्ययन करेगी। इसके आधार पर नशे की रोकथाम, उपचार और प्रभावित परिवारों के लिए नई नीतियों तथा कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश की जाएगी।
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