राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से संवाद में पीएम मोदी ने कहा- शिक्षक केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें, बच्चों के व्यवहार और जीवन में बदलाव पर भी रखें नजर
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से संवाद में पीएम मोदी ने कहा- शिक्षक केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें, बच्चों के व्यवहार और जीवन में बदलाव पर भी रखें नजर
खबर खास | नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित 82 शिक्षकों से संवाद करते हुए बच्चों से जुड़ी बदलती चुनौतियों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे केवल विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन तक सीमित न रहें, बल्कि उनके व्यवहार, आदतों और कक्षा के बाहर की जिंदगी पर भी नजर रखें। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से बच्चों में बढ़ते मोबाइल फोन के इस्तेमाल, अत्यधिक स्क्रीन समय और नशे की समस्या को लेकर शिक्षकों को सक्रिय भूमिका निभाने की सलाह दी।
लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित संवाद के दौरान मोदी ने कहा कि बच्चों का बचपन सुरक्षित रखना और उनकी स्वाभाविक जिज्ञासा को बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने शिक्षकों से अभिभावकों के साथ लगातार संवाद करने को कहा और यह जानने पर जोर दिया कि बच्चे मोबाइल फोन का इस्तेमाल कितनी देर करते हैं और क्या वे देर रात तक मोबाइल चलाते रहते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों को धीरे-धीरे अधिक स्क्रीन समय से दूर लाने के लिए उन्हें खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों से जोड़ना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों में नशे की संभावित आदतों के संकेतों के प्रति भी सतर्क रहने की सलाह दी और कहा कि जरूरत पड़ने पर ऐसे बच्चों की मदद करना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है।
मोदी ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं है। बदलते पारिवारिक ढांचे और संयुक्त परिवारों के कम होते प्रभाव के बीच बच्चों के मार्गदर्शन और भावनात्मक सहयोग में शिक्षकों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से विद्यार्थियों को किताबों और पारंपरिक कक्षा शिक्षण से आगे ले जाने की अपील की। उन्होंने शिक्षा को वास्तविक जीवन के अनुभवों और व्यावहारिक कौशल से जोड़ने तथा बच्चों में श्रम की गरिमा जैसे मूल्यों को विकसित करने पर जोर दिया।
संवाद के दौरान एक शिक्षिका ने प्रधानमंत्री के सामने अपनी घबराहट का जिक्र करते हुए उनके व्यक्तित्व की आभा को इसका कारण बताया। इस पर मोदी ने हल्के-फुल्के अंदाज में पूछा कि क्या आभा होना सार्वजनिक वक्ता के लिए नुकसानदायक है और शिक्षिका से अपने वक्तृत्व कौशल को बेहतर बनाने की सलाह भी मांगी।
पुरस्कार पाने वाले 82 शिक्षकों में 48 स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, 21 उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलीटेक्निक के शिक्षक एवं संकाय सदस्य तथा 13 कौशल प्रशिक्षक शामिल रहे। शिक्षकों ने संवाद के दौरान पढ़ाई को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए अपनाए गए अपने नवाचारों और अनुभवों को भी प्रधानमंत्री के साथ साझा किया।
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