पटियाला और फतेहगढ़ साहिब के 316 गांवों में पहुंचेगा स्वच्छ पेयजल; दूषित भूजल पर निर्भरता कम करने के लिए बिछाई गई 752 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन
पटियाला और फतेहगढ़ साहिब के 316 गांवों में पहुंचेगा स्वच्छ पेयजल; दूषित भूजल पर निर्भरता कम करने के लिए बिछाई गई 752 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन
खबर खास | मंडोली (पटियाला)
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोमवार को पटियाला जिले के घनौर विधानसभा क्षेत्र के गांव मंडोली में दो अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्रों को जनता को समर्पित किया। इन परियोजनाओं पर कुल ₹432.65 करोड़ खर्च किए गए हैं। इनके शुरू होने से पांच विधानसभा क्षेत्रों के करीब 75 हजार परिवारों के 4.5 लाख लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होगा।
इन दोनों परियोजनाओं से पटियाला और फतेहगढ़ साहिब क्षेत्र के 316 गांवों को लाभ मिलेगा। घरों तक शोधित पानी पहुंचाने के लिए कुल 752 किलोमीटर लंबा पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित भूजल पर निर्भरता कम करना और लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन गांवों के निवासी लंबे समय से पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे थे। उन्होंने बताया कि भूजल में फ्लोराइड और भारी धातुओं की अधिक मात्रा के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे पैदा हो रहे थे। अब नहर के पानी को आधुनिक तकनीक से शुद्ध करने के बाद घरों तक पहुंचाया जाएगा। इससे लोगों को साफ पानी मिलेगा और भूजल पर निर्भरता भी कम होगी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने इन गांवों की जरूरतों की अनदेखी की।
मंडोली में जल शोधन संयंत्र का निर्माण ₹266.20 करोड़ की लागत से किया गया है, जबकि पाबरी स्थित संयंत्र पर ₹166.46 करोड़ खर्च किए गए हैं। दोनों संयंत्रों की कुल जल शोधन क्षमता 69 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) है।
पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए दोनों संयंत्रों में प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पानी के नमूनों की शोधन प्रक्रिया से पहले और बाद में नियमित जांच की जाएगी। इसके अलावा, संयंत्रों और जल भंडारण टैंकों में पर्यवेक्षी नियंत्रण एवं डेटा अधिग्रहण प्रणाली (स्काडा) लगाई गई है। इसके माध्यम से पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा सकेगी।
इन संयंत्रों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी अगले 10 वर्षों तक संभालेगी। वहीं, गांवों में व्यवस्था की निगरानी के लिए सभी 316 गांवों में जल आपूर्ति एवं स्वच्छता समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां गांव स्तर पर पानी की आपूर्ति और पूरी व्यवस्था के कामकाज पर नजर रखेंगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और पटियाला शहरों के लिए नहर आधारित पेयजल परियोजनाओं पर काम कर रही है। इन परियोजनाओं से करीब 78 लाख शहरी निवासियों को लाभ पहुंचाने की योजना है। इनके तहत कुल 1,410 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) जल शोधन क्षमता विकसित की जा रही है।
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