पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बोले— पीजीआईएमईआर में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के लाभार्थियों को नहीं मिल रहा इलाज, पंजाब में बढ़ते डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कैंसर मामलों पर सरकार के पास ठोस कार्ययोजना नहीं
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बोले— पीजीआईएमईआर में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के लाभार्थियों को नहीं मिल रहा इलाज, पंजाब में बढ़ते डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कैंसर मामलों पर सरकार के पास ठोस कार्ययोजना नहीं
ख़बर ख़ास | चंडीगढ़
पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने राज्य में निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों द्वारा मरीजों से वसूले जा रहे भारी-भरकम इलाज खर्च पर चिंता जताते हुए पंजाब सरकार से सभी निजी अस्पतालों में इलाज की दरें निर्धारित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह निजी स्कूलों की फीस नियंत्रित करने के लिए जिला स्तर पर नियामक समितियां बनाई गई हैं, उसी तर्ज पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी एक प्रभावी नियामक व्यवस्था लागू की जानी चाहिए ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
सिद्धू ने आरोप लगाया कि राज्य के कई बड़े निजी अस्पताल पूरी तरह व्यावसायिक मॉडल पर संचालित हो रहे हैं, जहां डॉक्टरों के लिए वित्तीय लक्ष्य तय किए जाते हैं और उन्हें आर्थिक हिस्सेदारी भी दी जाती है। उन्होंने कहा कि इन अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखने के लिए फिलहाल कोई प्रभावी नियामक संस्था मौजूद नहीं है, जिससे आम मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि योजना के लाभार्थियों को पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। उनके अनुसार पंजाब के अधिकांश गंभीर मरीज सुपर स्पेशियलिटी इलाज के लिए पीजीआई को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों से रेफर होने के बावजूद मरीजों को बिना उपचार लौटना पड़ता है क्योंकि संस्थान ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना को मान्यता नहीं दी है। वहीं आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को वहां उपचार की सुविधा उपलब्ध है।
राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए सिद्धू ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने चुनाव के दौरान प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का वादा किया था, लेकिन मौजूदा सरकार अभी तक सरकारी अस्पतालों को भी अपेक्षित स्तर तक उन्नत नहीं कर सकी है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में निजी अस्पतालों में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं सहित सभी प्रमुख उपचारों की अधिकतम दरें तय करना समय की आवश्यकता बन गया है।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पंजाब आज मधुमेह, उच्च रक्तचाप, किडनी फेलियर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों से जूझ रहा है, लेकिन सरकार के पास इन चुनौतियों से निपटने के लिए कोई स्पष्ट कार्ययोजना या अद्यतन स्वास्थ्य डाटा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार लोगों के प्रमुख स्वास्थ्य मुद्दों पर गंभीर नहीं होगी तो स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।
अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए सिद्धू ने कहा कि वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने डॉ. के.के. तलवाड़ समिति की सिफारिशों के आधार पर निजी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कोविड उपचार की अधिकतम दर 18,000 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की थी। उन्होंने मांग की कि इसी तर्ज पर अब एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में सभी प्रकार के इलाज की दरें तय की जाएं। साथ ही उन्होंने पंजाब सरकार से मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में मरीजों को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाने की अपील की।
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