99% भारतीय निर्यात पर यूके में शून्य शुल्क, 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 120 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद
99% भारतीय निर्यात पर यूके में शून्य शुल्क, 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 120 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद
खबर खास | नई दिल्ली
भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (मुक्त व्यापार समझौता-एफटीए) मंगलवार से आधिकारिक रूप से लागू हो गया। यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। इसके लागू होने से भारत में ब्रिटेन से आयात होने वाली कई प्रीमियम वस्तुएं जैसे लग्जरी कारें, स्कॉच व्हिस्की, परिधान, फुटवियर, कॉस्मेटिक्स और प्रीमियम खाद्य उत्पाद पहले की तुलना में सस्ते हो जाएंगे। वहीं भारतीय निर्यातकों को यूके के बाजार में लगभग पूरी तरह शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।
समझौते के तहत भारत के 99% उत्पादों को अब यूके में शून्य आयात शुल्क (मुक्त व्यापार समझौता-एफटीए) का लाभ मिलेगा, जबकि भारत में आने वाले लगभग 99% ब्रिटिश उत्पादों पर औसत आयात शुल्क घटकर करीब 3% रह जाएगा। दोनों देशों को उम्मीद है कि इस समझौते से वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 120 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।
यह समझौता लगभग तीन वर्षों तक चली 14 दौर की बातचीत के बाद 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षरित किया गया था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और यूके के बिजनेस एवं ट्रेड सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
समझौते के लागू होने से पहले भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसे "ऐतिहासिक क्षण" बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकास के नए युग की शुरुआत करेगा।
भारत में क्या होगा सस्ता?
स्कॉच व्हिस्की और जिन:
इन पर लगने वाला आयात शुल्क 150% से घटाकर 75% कर दिया गया है, जिसे अगले दस वर्षों में घटाकर 40% किया जाएगा। इससे ₹5,000 की स्कॉच व्हिस्की की बोतल की कीमत घटकर लगभग ₹3,500 तक आ सकती है।
कॉस्मेटिक्स, मेडिकल उपकरण और एयरोस्पेस पार्ट्स:
इन पर आयात शुल्क लगभग 15% से घटकर 3% रह जाएगा, जिससे इनकी कीमतों में कमी आएगी।
लग्जरी कारें:
जगुआर लैंड रोवर और रोल्स-रॉयस जैसी यूके निर्मित लग्जरी कारों पर शुल्क लगभग 100% से घटकर कोटा प्रणाली के तहत 10% रह जाएगा। इससे इनकी कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक गिरावट संभव है।
फैशन और लाइफस्टाइल उत्पाद:
ब्रिटिश ब्रांडेड कपड़े, जूते, होमवेयर, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक्स भी पहले से अधिक किफायती हो जाएंगे।
खाद्य एवं पेय पदार्थ:
सैल्मन, लैम्ब, चॉकलेट, बिस्किट और सॉफ्ट ड्रिंक्स पर शुल्क कम होने से खुदरा कीमतों में कमी आएगी।
भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा फायदा
टेक्सटाइल और होम फर्निशिंग:
भारतीय रेडीमेड गारमेंट्स, बेड लिनेन, पर्दे और होम टेक्सटाइल्स पर यूके में लगने वाला 8-12% आयात शुल्क समाप्त कर दिया गया है। इससे तिरुपुर, सूरत और लुधियाना जैसे निर्यात केंद्रों को अगले तीन वर्षों में 40% तक वृद्धि मिलने की संभावना है।
फार्मास्यूटिकल्स:
भारतीय जेनेरिक दवा कंपनियों को सरल पंजीकरण प्रक्रिया का लाभ मिलेगा, जिससे ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) तक उनकी पहुंच आसान होगी।
कृषि और समुद्री उत्पाद:
बासमती चावल, प्रीमियम चाय, मसाले और झींगा सहित समुद्री उत्पादों पर आयात शुल्क हटने से असम, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल के निर्यातकों को लाभ मिलेगा।
रसायन उद्योग:
एग्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और स्पेशलिटी केमिकल्स पर शुल्क कम होने से गुजरात और महाराष्ट्र के निर्यातकों को बढ़ावा मिलेगा। भारत ने 2030 तक यूके को रसायनों के निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।
ज्वेलरी और लेदर उत्पाद:
भारतीय आभूषण, हैंडबैग, फुटवियर और चमड़े के उत्पाद अब यूके में शुल्क-मुक्त प्रवेश करेंगे, जिससे एमएसएमई और लग्जरी ब्रांड्स को बड़ा लाभ मिलेगा।
इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट्स:
यूके ने भारतीय मशीनरी, इंजीनियरिंग उपकरण और ऑटो पार्ट्स पर आयात शुल्क समाप्त कर दिया है, जिससे भारत, यूके और यूरोप के बीच औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला और मजबूत होगी।
स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग
व्यापार के अलावा यह समझौता दोनों देशों के बीच सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भी नई गति देगा। साथ ही भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में ब्रिटिश निवेश बढ़ने से नई तकनीकों के विकास और नवाचार को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
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