पूर्व पंजाब मुख्य सचिव सर्वेश कौशल, पूर्व स्पेशल मुख्य सचिव KBS सिद्धू और पूर्व सिंचाई सचिव कहन सिंह पन्नू को बड़ी राहत; विजिलेंस ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को बताया कि कथित ₹1,200 करोड़ के सिंचाई परियोजना मामले में रिश्वत का कोई दस्तावेजी सबूत, बरामदगी या आरोपों की पुष्टि करने वाला गवाह नहीं मिला।
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब के कथित ₹1,200 करोड़ के सिंचाई घोटाले में तीन सेवानिवृत्त IAS अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को बताया है कि जांच के दौरान इन अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला।
इन अधिकारियों में पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव सर्वेश कौशल, पूर्व स्पेशल मुख्य सचिव KBS सिद्धू और पूर्व सिंचाई विभाग के सचिव कहन सिंह पन्नू शामिल हैं। विजिलेंस की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ताओं को कथित रिश्वत की कोई रकम बरामद नहीं हुई। इसके अलावा भ्रष्टाचार से संबंधित कोई दस्तावेजी सबूत और ऐसा कोई गवाह भी नहीं मिला, जिसने इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत के आरोपों की पुष्टि की हो।
हाईकोर्ट ने 15 मई को पंजाब सरकार को 15 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया था। इन अधिकारियों के खिलाफ जांच तीन साल से अधिक समय से लंबित थी।
यह मामला 2007 से 2017 के बीच अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में सिंचाई और जल संबंधी परियोजनाओं के आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप था कि ₹1,000 से ₹1,200 करोड़ तक की परियोजनाओं के टेंडर इस तरह तैयार किए गए थे कि ठेकेदार गुरिंदर सिंह को लाभ पहुंचाया जा सके, जिससे राज्य के खजाने को नुकसान हुआ।
विजिलेंस ब्यूरो ने 29 सितंबर 2022 को दर्ज विजिलेंस इंक्वायरी नंबर 08 के तहत मामले की जांच की। जांच मुख्य रूप से गुरिंदर सिंह के 2017 के उस खुलासे वाले बयान पर आधारित थी, जो पहले दर्ज एक FIR की जांच के दौरान सामने आया था। इस FIR में IPC की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।
जांच के दौरान अधिकारियों ने पुलिस रिकॉर्ड, विभागीय फाइलें, चालान और गवाहों के बयान खंगाले। हालांकि, इन तीनों सेवानिवृत्त अधिकारियों को रिश्वत या कथित अनियमितताओं से जोड़ने वाली कोई सामग्री नहीं मिली। विजिलेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि खुलासे वाला बयान मूल FIR के चालान का हिस्सा नहीं था।
जांचकर्ताओं ने मूल FIR और गवाहों के बयानों से जुड़े दस्तावेजों समेत कुल 588 पन्नों के रिकॉर्ड की भी जांच की। इसके बाद निष्कर्ष निकाला गया कि तीनों अधिकारियों को कथित घोटाले से जोड़ने के लिए पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं हैं।
विजिलेंस ब्यूरो द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद यह मामला पंजाब के चर्चित कथित भ्रष्टाचार मामलों में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है।
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