नियमितीकरण और आउटसोर्सिंग खत्म करने समेत कई मांगों पर अड़ी यूनियन, सरकार से वार्ता बेनतीजा रही तो अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
नियमितीकरण और आउटसोर्सिंग खत्म करने समेत कई मांगों पर अड़ी यूनियन, सरकार से वार्ता बेनतीजा रही तो अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
चंडीगढ़, 3 अगस्त
पंजाब रोडवेज, पनबस (Punbus) और पंजाब रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (PRTC) के संविदा कर्मचारियों की राज्यव्यापी हड़ताल सोमवार से शुरू हो गई, जिससे प्रदेशभर में सरकारी बस सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं। कई डिपो में बसों का संचालन बाधित होने से छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, महिला यात्रियों और रोजाना सफर करने वाले हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पंजाब रोडवेज, पनबस एवं पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने अपनी लंबित मांगों को लेकर यह हड़ताल शुरू की है। यूनियन की प्रमुख मांगों में लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को नियमित करना, आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करना तथा पिछले वर्ष हुए आंदोलन के दौरान कर्मचारियों और यूनियन नेताओं पर दर्ज पुलिस मामलों को वापस लेना शामिल है।
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने बताया कि सरकार को पहले ही हड़ताल का नोटिस दे दिया गया था। कई दौर की बैठकों और आश्वासनों के बावजूद अब तक कोई ठोस फैसला या आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई। इसी के चलते रविवार मध्यरात्रि से पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी के सभी संविदा कर्मचारी हड़ताल पर चले गए।
उन्होंने कहा कि सोमवार सुबह 10 बजे परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा के साथ बैठक प्रस्तावित है। यदि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर लिखित आश्वासन देने में विफल रहती है तो हड़ताल अनिश्चितकाल तक जारी रहेगी। इसके अलावा, पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान मंगलवार से मोहाली में भूख हड़ताल भी शुरू की जाएगी।
यूनियन का कहना है कि विभाग में पिछले 12 वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए। साथ ही, लगभग 16 वर्षों से आउटसोर्सिंग के जरिए काम कर रहे कर्मचारियों को विभाग की प्रत्यक्ष संविदा व्यवस्था के तहत लाया जाए।
कर्मचारियों ने नवंबर 2025 में किलोमीटर स्कीम के विरोध में हुए आंदोलन के दौरान दर्ज पुलिस मामलों को वापस लेने की मांग भी दोहराई है। उस प्रदर्शन के दौरान हिंसा की घटनाओं के बाद कई यूनियन नेताओं और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे।
हड़ताल का असर सोमवार सुबह से ही राज्य के कई बस डिपो में दिखाई देने लगा। बसों के कम संचालन के कारण यात्रियों को निजी वाहनों और अन्य परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। यदि सरकार और यूनियन के बीच बातचीत सफल नहीं होती, तो आने वाले दिनों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर इसका असर और अधिक गहरा सकता है।
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