सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही जला सकेंगे पटाखे; अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और अन्य निर्धारित संवेदनशील क्षेत्रों को बनाया जाएगा पटाखा-मुक्त क्षेत्र
सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही जला सकेंगे पटाखे; अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और अन्य निर्धारित संवेदनशील क्षेत्रों को बनाया जाएगा पटाखा-मुक्त क्षेत्र
खबर खास | नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 7 और 8 नवंबर 2026 को ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दे दी है। अदालत के इस फैसले के बाद लोग निर्धारित समय-सीमा के भीतर पटाखे जलाकर उत्सव मना सकेंगे। कोर्ट ने पटाखे जलाने के लिए सुबह और रात के समय तय किए हैं, ताकि वायु प्रदूषण और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को नियंत्रित किया जा सके।
अदालत के निर्देशों के अनुसार, दोनों दिन सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक ही ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे। यह अनुमति सुप्रीम कोर्ट के 15 अक्टूबर 2025 के पहले के आदेश के अनुरूप दी गई है।
अस्पतालों और संवेदनशील क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में प्रतिबंध
सुप्रीम कोर्ट ने संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए कुछ क्षेत्रों में पटाखे जलाने पर पूरी तरह रोक लगाई है। अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक और जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों तथा अधिसूचित शांत क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी।
शिक्षण संस्थानों को भी पटाखा-मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाएगा। इन प्रतिबंधित क्षेत्रों की उचित पहचान और चिह्नांकन करना अनिवार्य होगा, ताकि आम लोगों को वहां लागू नियमों की जानकारी मिल सके।
पटाखों से वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर असर की चिंता
पटाखे जलाने को लेकर ये पाबंदियां वायु गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए लगाई गई हैं। पटाखों के जलने से वातावरण में बड़ी मात्रा में सूक्ष्म कण फैलते हैं, जिनमें पीएम10 और पीएम2.5 शामिल हैं।
ये कण ठोस पदार्थों और हवा में मौजूद तरल बूंदों के मिश्रण से बनते हैं। इनका आकार बेहद छोटा होने के कारण ये सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं।
सूक्ष्म कण फेफड़ों से रक्त प्रवाह तक पहुंच सकते हैं
बारीक प्रदूषक कण फेफड़ों के ऊतकों में प्रवेश कर रक्त प्रवाह तक पहुंच सकते हैं और शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकते हैं। ऐसे सूक्ष्म कणों की मौजूदगी मस्तिष्क में भी दर्ज की गई है। इससे शरीर के विभिन्न अंगों पर प्रदूषण के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता बढ़ती है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उद्देश्य पटाखों के इस्तेमाल को निर्धारित समय और स्थान तक सीमित रखना है, ताकि प्रदूषण के संपर्क को कम किया जा सके। खासतौर पर अस्पतालों में भर्ती मरीजों, बुजुर्गों और विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष प्रतिबंध लगाए गए हैं।
Like
Dislike
Love
Angry
Sad
Funny
Wow
पंजाब : सभी पुलिस थानों व सरकारी स्थानों पर मौजूद लावारिस वाहन 30 दिन के भीतर हटाने के आदेश
January 18, 2026
Comments 0