कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए पांच समूह भी फंसे, 21 तमिलनाडु नागरिक सुरक्षित; भारत ने नेपाल को दो विमानों से भेजी 47 टन राहत सामग्री
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए पांच समूह भी फंसे, 21 तमिलनाडु नागरिक सुरक्षित; भारत ने नेपाल को दो विमानों से भेजी 47 टन राहत सामग्री
नेपाल में भोटेकोसी नदी में आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन के बाद बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल में कुल 288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी मिली है। इनमें त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 73 लोग भी शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, लापता भारतीयों में तमिलनाडु के दो समूह शामिल हैं, जिनमें एक समूह में 37 और दूसरे में 39 लोग हैं। ये सभी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के 32 लोगों का एक समूह और केरल के 33 लोगों का एक समूह भी नेपाल में लापता बताया गया है। विभिन्न राज्यों के 61 अन्य लोगों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कुल पांच समूहों के नेपाल में फंसे होने की जानकारी है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि तमिलनाडु के 21 लापता यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार इन लोगों को जल्द ही काठमांडू से नई दिल्ली लाया जाएगा। इसके अलावा कई कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री चीन में भी फंसे हुए हैं। इनकी संख्या करीब 200 बताई जा रही है और उन्हें भी जल्द भारत लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
नेपाल में आई भीषण आपदा के बीच भारत ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत ने नेपाल के लिए दो विशेष विमान भेजे हैं। बुधवार को सी-130जे विमान करीब 10 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा था। इसमें अस्थायी शेल्टर और दवाइयों समेत जरूरी सामान शामिल था।
इसके बाद गुरुवार को सी-17 विमान के जरिए 37 टन और राहत सामग्री नेपाल भेजी गई। इसमें करीब आठ टन दवाइयां और एक टन खाद्य सामग्री शामिल है। इस तरह दो दिनों में भारत की ओर से नेपाल को कुल 47 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि नेपाल को भेजी जा रही राहत सामग्री वहां की जरूरत और मांग के आधार पर उपलब्ध कराई जा रही है।
भारतीय नागरिकों की मदद के लिए विदेश मंत्रालय में एक विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इसके अलावा नेपाल और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। रणधीर जायसवाल ने बताया कि बाढ़ के कारण नेपाल में संचार और मोबाइल नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसके चलते कई लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
भारतीय दूतावास 24 घंटे हेल्पलाइन के जरिए लोगों की सहायता कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय का कहना है कि जैसे-जैसे लापता और प्रभावित भारतीयों को लेकर नई जानकारी सामने आएगी, उसके बारे में अपडेट जारी किया जाएगा।
जयशंकर ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
नेपाल में आई बाढ़ की भयावह स्थिति को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में विदेश सचिव, विदेश मंत्रालय की टीम और काठमांडू तथा बीजिंग में भारत के राजदूत शामिल हुए। इस दौरान नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की स्थिति, उनकी सुरक्षा और राहत एवं बचाव अभियान की समीक्षा की गई।
एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीयों की स्थिति और सुरक्षा की जानकारी जुटाने के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और संबंधित परियोजना अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है।
भारत नेपाल सरकार और स्थानीय अधिकारियों के साथ भी लगातार संपर्क में है। फिलहाल प्राथमिकता लापता भारतीयों का पता लगाने, सुरक्षित स्थानों पर फंसे लोगों तक मदद पहुंचाने और नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालने की है।
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