पनबस और PRTC के कर्मचारियों ने सरकार को दिया अल्टीमेटम, मांगें पूरी न होने पर पूरे पंजाब में ट्रैफिक जाम का ऐलान
पनबस और PRTC के कर्मचारियों ने सरकार को दिया अल्टीमेटम, मांगें पूरी न होने पर पूरे पंजाब में ट्रैफिक जाम का ऐलान
पंजाब में सरकारी बसों की सेवाएं एक बार फिर प्रभावित होने की आशंका है। पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC के कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने 22 सितंबर 2026 से पूरे पंजाब में पक्का चक्का जाम करने का ऐलान किया है। यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार के साथ करीब चार वर्षों में 59 बैठकें होने के बावजूद कर्मचारियों की प्रमुख मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
संगरूर डिपो के प्रेसिडेंट हरप्रीत सिंह ग्रेवाल ने वर्कर्स को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम के तहत GST, कमीशन और रिश्वत के नाम पर विभाग और कर्मचारियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में लिखित शिकायतें और सबूत दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। यूनियन का आरोप है कि कर्मचारियों का EPF और ESI भी जमा नहीं किया जा रहा, जबकि विरोध के बावजूद नए कॉन्ट्रैक्टर नियुक्त किए जा रहे हैं।
वाइस प्रेसिडेंट रमनदीप सिंह, लखविंदर सिंह बिट्टू और असिस्टेंट सेक्रेटरी गुरजीत सिंह ने कहा कि कम वेतन और समय पर भुगतान नहीं होने के कारण कर्मचारियों के लिए परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार फ्री सफर की सुविधा के करीब 1200 करोड़ रुपये जारी नहीं कर रही है और कर्मचारियों को नियमित करने की दिशा में भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। नेताओं ने कहा कि इन्हीं मुद्दों को लेकर 22 सितंबर से गेट रैली के साथ पक्का रोड जाम किया जाएगा।
यूनियन नेताओं परमिंदर सिंह जस्सर, गुरदीप सिंह और गुरप्रीत सिंह ने किलोमीटर स्कीम को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नई बसें लाने के बजाय किलोमीटर स्कीम की बसों को फ्लैग ऑफ कर सरकार आंकड़ों को बेहतर दिखाने की कोशिश कर रही है। नेताओं के मुताबिक, किलोमीटर स्कीम के विरोध में आंदोलन करने वाले कर्मचारियों पर मामले दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया, जिसे उन्होंने सरकार का तानाशाही रवैया बताया।
यूनियन ने कहा है कि 17 सितंबर 2026 को सरकार के साथ होने वाली बैठक बेहद अहम होगी। कर्मचारियों की मांग है कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को सर्विस रूल्स के तहत नियमित किया जाए, आउटसोर्स कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था में लाया जाए, समान काम के लिए समान वेतन लागू किया जाए और कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएं। यूनियन नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर बैठक में इन मांगों का समाधान नहीं निकला तो 22 सितंबर से पूरे पंजाब में सरकारी बसों का पक्का चक्का जाम किया जाएगा।
हरप्रीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि पिछले चार वर्षों में सरकार के साथ करीब 59 बैठकें हो चुकी हैं। हर बार आश्वासन देकर कर्मचारियों के संघर्ष को टाल दिया गया, लेकिन अब यूनियन ने सरकार को एक और मौका दिया है। उन्होंने कहा कि 17 सितंबर की बैठक में यदि ठोस फैसला नहीं हुआ तो 22 सितंबर से आंदोलन को पूरे पंजाब में बड़े स्तर पर शुरू किया जाएगा।
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