‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ विवाद में दर्ज मामलों पर लगा विराम, कोर्ट ने दोनों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ विवाद में दर्ज मामलों पर लगा विराम, कोर्ट ने दोनों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ शो से जुड़े विवाद में स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना और यूट्यूबर-पॉडकास्टर रणवीर इलाहाबादिया को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने शो में की गई विवादित टिप्पणियों को लेकर दोनों के खिलाफ अलग-अलग जगहों पर दर्ज सभी FIR रद्द करने का आदेश दिया है। हालांकि, अदालत के पहले के निर्देशों का कथित रूप से पालन नहीं करने पर दोनों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब रणवीर इलाहाबादिया समय रैना के शो ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ में शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान की गई कुछ टिप्पणियों को अश्लील, आपत्तिजनक और असंवेदनशील बताते हुए देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी विरोध हुआ था। इसके बाद दोनों के खिलाफ कई राज्यों में शिकायतें और FIR दर्ज की गई थीं। इन मामलों में अश्लीलता और अभद्र भाषा के इस्तेमाल समेत कई आरोप लगाए गए थे।
FIR के खिलाफ रणवीर इलाहाबादिया ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने विवादित टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए स्पष्ट किया था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार ऐसी भाषा के इस्तेमाल की खुली छूट नहीं देता, जो सामाजिक मानदंडों का उल्लंघन करे।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इलाहाबादिया को अंतरिम राहत भी दी थी। जान से मारने की धमकियों की खबरों के बाद उन्हें पुलिस सुरक्षा लेने की अनुमति दी गई थी। साथ ही, अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को एक साथ करने और जांच से जुड़े निर्देश भी जारी किए गए थे।
मामला मार्च 2025 में एक बार फिर चर्चा में आया, जब समय रैना ने कनाडा में अपने शो के दौरान इस विवाद को लेकर टिप्पणी की थी। 3 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मामले की कार्यवाही पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करने को लेकर कड़ी चेतावनी दी थी। अदालत ने साफ किया था कि न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के आदेशों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रणवीर इलाहाबादिया के पॉडकास्ट ‘द रणवीर शो’ को दोबारा शुरू करने के अनुरोध पर भी विचार किया। कोर्ट ने उन्हें पॉडकास्ट फिर से शुरू करने की अनुमति दी, लेकिन साथ ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक नैतिकता के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इलाहाबादिया की ओर से अदालत को बताया गया था कि उनका पॉडकास्ट उनकी आजीविका का प्रमुख जरिया है और करीब 280 लोग इससे जुड़े हुए हैं। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा को भी आगे बढ़ाया और उन्हें गुवाहाटी में चल रही जांच में शामिल होने का निर्देश दिया।
अब 14 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने को लेकर कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने उनके रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सार्वजनिक प्रभाव रखने वाले लोगों से अदालत के आदेशों के पालन की अपेक्षा की जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया समेत संबंधित पक्षों पर 3-3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही उन्हें अदालत के निर्देशों के अनुपालन से संबंधित हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। इस तरह FIR रद्द होने से दोनों को बड़ी कानूनी राहत मिली है, लेकिन अदालत के आदेशों के पालन को लेकर उन पर जुर्माना भी लगाया गया है।
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