₹31 करोड़ की लागत से विकसित चौधरी बंसीलाल सिविल एयरोड्रोम परियोजना का शुभारंभ; मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पायलट प्रशिक्षण, हिसार से बढ़ती हवाई कनेक्टिविटी और एयरपोर्ट को एमआरओ हब के रूप में विकसित करने की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
₹31 करोड़ की लागत से विकसित चौधरी बंसीलाल सिविल एयरोड्रोम परियोजना का शुभारंभ; मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पायलट प्रशिक्षण, हिसार से बढ़ती हवाई कनेक्टिविटी और एयरपोर्ट को एमआरओ हब के रूप में विकसित करने की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
खबर खास | भिवानी
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को कहा कि राज्य नागरिक उड्डयन क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है और भारत के विमानन मानचित्र पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने यह बात भिवानी स्थित चौधरी बंसीलाल सिविल एयरोड्रोम में ₹31 करोड़ की लागत से निर्मित नए हैंगर, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) भवन, सुरक्षा चौकी और कैंटीन के उद्घाटन अवसर पर कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नया हैंगर और एटीसी भवन एयरोड्रोम से हेलीकॉप्टरों और विमानों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करेगा, साथ ही विमान रखरखाव और सर्विसिंग को भी अधिक प्रभावी बनाएगा।
उद्घाटन समारोह के बाद अपने संबोधन में सैनी ने चौधरी बंसीलाल एयरोड्रोम में प्रशिक्षण पूरा करने वाले 120 पायलटों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
हरियाणा के तेजी से विकसित हो रहे विमानन नेटवर्क का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने के विजन के अनुरूप तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि हिसार हवाई अड्डे से चंडीगढ़, जयपुर और अयोध्या के लिए सीधी उड़ान सेवाएं शुरू की जा चुकी हैं, जबकि जल्द ही जम्मू, अहमदाबाद और दिल्ली को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
सैनी ने कहा कि हिसार हवाई अड्डे पर यात्री टर्मिनल और कार्गो टर्मिनल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और वर्ष 2027 तक हवाई अड्डे के पूर्ण रूप से विकसित हो जाने की उम्मीद है।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में भिवानी एयरोड्रोम में फ्लाइट ट्रेनिंग गतिविधियों को और गति मिलेगी, जिससे अधिक कुशल पायलट तैयार होंगे और भारत के विमानन क्षेत्र में हरियाणा का योगदान और मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री ने आगे घोषणा की कि हिसार को मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ) हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे विमानों के रखरखाव के लिए विदेशी सुविधाओं पर निर्भरता कम होगी। प्रस्तावित एमआरओ केंद्र विमान रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल की समग्र सेवाएं प्रदान करेगा, जिससे विमान हमेशा उड़ान के लिए तैयार रहेंगे और राज्य की विमानन अवसंरचना को भी मजबूती मिलेगी।
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