वैज्ञानिकों ने जिज्ञासा से अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि यदि कभी पृथ्वी से बाहर की कोई बुद्धिमान सभ्यता संपर्क करने का प्रयास करे, तो उसके संदेश को पूरी तरह समझे बिना तत्काल जवाब नहीं दिया जाना चाहिए।
वैज्ञानिकों ने जिज्ञासा से अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि यदि कभी पृथ्वी से बाहर की कोई बुद्धिमान सभ्यता संपर्क करने का प्रयास करे, तो उसके संदेश को पूरी तरह समझे बिना तत्काल जवाब नहीं दिया जाना चाहिए।
खबर खास | नई दिल्ली
एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने पृथ्वी के बाहर जीवन (एलियन) की संभावना को लेकर बहस को फिर से तेज कर दिया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि भविष्य में कभी किसी बुद्धिमान एलियन सभ्यता की ओर से पृथ्वी से संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया जाता है, तो मानवता को तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए। इसके बजाय, प्राप्त संदेश या संकेत का गहन वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाना चाहिए और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाना चाहिए।
अध्ययन के अनुसार, फिलहाल इस बात का कोई पुष्ट प्रमाण नहीं है कि ब्रह्मांड में कहीं और बुद्धिमान सभ्यताएँ मौजूद हैं। फिर भी वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी अज्ञात और संभवतः अत्यधिक विकसित सभ्यता के साथ संपर्क के मामले में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
शोधकर्ताओं का तर्क है कि बिना पूरी जानकारी के तत्काल जवाब देना जोखिमपूर्ण हो सकता है, क्योंकि ऐसी सभ्यता की मंशा, तकनीकी क्षमता और उद्देश्यों के बारे में हमें कुछ भी ज्ञात नहीं होगा।
खगोलशास्त्री टी. जोसेफ ने कहा कि एलियन जांच यान (प्रोब) या निगरानी करने वाले अंतरिक्ष यान की अवधारणा उतनी अविश्वसनीय नहीं है जितनी पहली नजर में लगती है। उन्होंने बताया कि मानव जाति स्वयं पाँच अंतरिक्ष यान—पायनियर 10, पायनियर 11, वॉयजर 1, वॉयजर 2 और न्यू होराइजन्स—अंतरिक्ष में भेज चुकी है, जो सौर मंडल से बाहर की यात्रा पर हैं। इससे यह संभावना भी बनती है कि कोई उन्नत बाह्य-सभ्यता इसी तरह के यान अंतरतारकीय अंतरिक्ष में भेज सकती है।
शोध में चार संभावित तरीकों का उल्लेख किया गया है जिनके माध्यम से एलियन तकनीक हमारे सौर मंडल में मौजूद हो सकती है। इनमें अंतरिक्ष में निष्क्रिय रूप से तैरते हुए प्रोब, जानकारी एकत्र करने वाले सक्रिय अंतरिक्ष यान, ग्रहों या चंद्रमाओं पर दुर्घटनाग्रस्त अथवा उतरे हुए यंत्र, तथा किसी खगोलीय पिंड पर स्थापित स्वचालित एलियन ठिकाने शामिल हैं।
हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में सौर मंडल में एलियन आगंतुकों या उनकी किसी तकनीक के मौजूद होने का कोई सत्यापित प्रमाण उपलब्ध नहीं है। यह अध्ययन मुख्य रूप से इस बात पर विचार करता है कि यदि भविष्य में कभी बुद्धिमान बाह्य-जीवन से पहला संपर्क होता है, तो मानवता को किस प्रकार तैयार रहना चाहिए। वैज्ञानिकों का निष्कर्ष है कि ऐसी किसी भी स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय सावधानीपूर्वक वैज्ञानिक जांच और मूल्यांकन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
Like
Dislike
Love
Angry
Sad
Funny
Wow
Comments 0