8.37 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत मोहाली, अमृतसर, लुधियाना और बठिंडा की लैब में लगेंगे विशेष उपकरण; ड्रोन के जीपीएस रिकॉर्ड, उड़ान का इतिहास, कैमरे की फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की होगी जांच
8.37 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत मोहाली, अमृतसर, लुधियाना और बठिंडा की लैब में लगेंगे विशेष उपकरण; ड्रोन के जीपीएस रिकॉर्ड, उड़ान का इतिहास, कैमरे की फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की होगी जांच
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब में ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार फॉरेंसिक जांच में आधुनिक तकनीक शामिल करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत राज्य की चार प्रयोगशालाओं में विशेष ड्रोन फॉरेंसिक उपकरण लगाए जाएंगे। इस परियोजना पर करीब 8.37 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका उद्देश्य सीमा पार तस्करी, नशीले पदार्थों की आपूर्ति और अन्य आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने के संदेह वाले ड्रोन से बरामद डिजिटल साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच करने की क्षमता बढ़ाना है।
इस परियोजना के तहत मोहाली स्थित साइबर फॉरेंसिक डिवीजन और अमृतसर, लुधियाना तथा बठिंडा की क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में विशेष उपकरण स्थापित किए जाएंगे।
इस कदम से राज्य के फॉरेंसिक जांच ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है। जांच एजेंसियों के विशेषज्ञ बरामद ड्रोन और उनसे जुड़े डिजिटल उपकरणों की तकनीकी जांच कर सकेंगे। इससे संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े मामलों में डिजिटल साक्ष्य जुटाने और उनका विश्लेषण करने में मदद मिलेगी।
ड्रोन में छिपे डिजिटल डेटा से मिल सकते हैं अहम सुराग
ड्रोन केवल उड़ने वाले उपकरण नहीं हैं, बल्कि उनकी तकनीकी बनावट के आधार पर उनमें कई तरह की डिजिटल जानकारियां भी सुरक्षित रह सकती हैं। इनमें उड़ान का इतिहास, जीपीएस लोकेशन, कैमरे से रिकॉर्ड किए गए वीडियो, कंट्रोलर की गतिविधियां और संचालन से जुड़ा अन्य डेटा शामिल हो सकता है।
विशेष फॉरेंसिक उपकरणों की मदद से जांचकर्ता बरामद ड्रोन, फ्लाइट कंट्रोलर, स्टोरेज सिस्टम और कैमरा उपकरणों से उपलब्ध जानकारी निकालने, सुरक्षित रखने और उसका विश्लेषण करने में सक्षम होंगे।
इन डिजिटल रिकॉर्ड से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि ड्रोन ने किस दिशा में उड़ान भरी, वह किन स्थानों तक पहुंचा और किस समय सक्रिय था। इससे जांच एजेंसियों को संदिग्ध ड्रोन की गतिविधियों और उसके इस्तेमाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं।
जीपीएस लोकेशन और उड़ान रिकॉर्ड की होगी जांच
प्रस्तावित तकनीक का एक प्रमुख हिस्सा जीपीएस रिकॉर्ड और उड़ान लॉग की जांच करना होगा। फॉरेंसिक विशेषज्ञ उपलब्ध लोकेशन संबंधी जानकारी, समय और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड का विश्लेषण कर सकेंगे। ये जानकारियां जांच के दौरान अहम सुराग उपलब्ध करा सकती हैं।
फॉरेंसिक जांच से मिले निष्कर्षों का सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के साथ मिलान भी किया जा सकेगा। इससे संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों की अधिक विस्तृत तस्वीर तैयार करने में मदद मिलेगी।
हालांकि, ड्रोन से कितना डेटा प्राप्त किया जा सकेगा, यह उसके मॉडल, सॉफ्टवेयर, एन्क्रिप्शन तकनीक और उसकी भौतिक स्थिति पर निर्भर करेगा।
मोहाली, अमृतसर, लुधियाना और बठिंडा में मिलेंगी विशेष सुविधाएं
इस परियोजना के तहत मोहाली, अमृतसर, लुधियाना और बठिंडा में विशेष ड्रोन फॉरेंसिक जांच की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे पंजाब के चार महत्वपूर्ण शहरों में जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकी सहायता मिल सकेगी।
अमृतसर की प्रयोगशाला सीमा से सटे इलाकों में संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों से जुड़े मामलों की जांच के लिहाज से विशेष महत्व रख सकती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों और हथियारों की कथित आपूर्ति सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय रही है।
क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं को भी आधुनिक उपकरणों से लैस करने से जांच एजेंसियों को हर मामले में किसी एक केंद्रीय प्रयोगशाला पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे विशेष फॉरेंसिक जांच तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
नई तकनीक से किन डिजिटल साक्ष्यों की होगी जांच?
विशेष उपकरणों की मदद से फॉरेंसिक टीमें कई तरह के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर सकेंगी। इनमें ड्रोन की उड़ान का इतिहास और उपलब्ध उड़ान लॉग, जीपीएस निर्देशांक और लोकेशन संबंधी रिकॉर्ड, समर्थित उपकरणों में सुरक्षित तस्वीरें और वीडियो, फ्लाइट कंट्रोलर का डेटा, उससे जुड़े स्टोरेज सिस्टम, डिवाइस की पहचान संबंधी जानकारी और आपराधिक जांच से जुड़े अन्य डिजिटल निशान शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, केवल डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर ड्रोन संचालक की पहचान या किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं की जा सकती। इसके लिए जांचकर्ताओं को फॉरेंसिक निष्कर्षों का अन्य साक्ष्यों से मिलान करना होगा और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
डिजिटल जांच क्षमता को मिलेगी मजबूती
यह पहल पंजाब के मौजूदा फॉरेंसिक ढांचे में आधुनिक तकनीक को शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। ड्रोन और डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े मामलों की संख्या बढ़ने के बीच विशेष उपकरणों की उपलब्धता जांच एजेंसियों को अधिक व्यवस्थित तरीके से वैज्ञानिक सुराग जुटाने में मदद कर सकती है।
चार शहरों में इन सुविधाओं के विकसित होने से तकनीकी जांच की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना की दीर्घकालिक सफलता उपकरणों की क्षमता, अलग-अलग कंपनियों के ड्रोन के साथ उनकी अनुकूलता, प्रशिक्षित फॉरेंसिक कर्मचारियों की उपलब्धता और नियमित रखरखाव पर निर्भर करेगी।
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