आज सावन पूर्णिमा पर पूरे दिन भद्रा नहीं होने से बहनें तीन शुभ समय में बांध सकेंगी राखी
आज सावन पूर्णिमा पर पूरे दिन भद्रा नहीं होने से बहनें तीन शुभ समय में बांध सकेंगी राखी
खबर खास | नई दिल्ली
सावन पूर्णिमा के अवसर पर आज पूरे देश में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा रहा है। इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व विशेष महत्व रखता है, क्योंकि पूरे दिन भद्रा का साया नहीं है। ऐसे में भाई-बहन बिना किसी रोक-टोक के राखी बांधने और बंधवाने की रस्म पूरी कर सकते हैं।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच राखी बांधने के लिए तीन शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। पहला शुभ समय सुबह 6:15 बजे से 11:00 बजे तक, दूसरा दोपहर 12:30 बजे से 2:00 बजे तक और तीसरा शाम 5:30 बजे से 7:00 बजे तक है। हिंदू धर्मग्रंथों में परंपरागत रूप से रक्षाबंधन की रस्म सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच करने की सलाह दी गई है।
आज रक्षाबंधन को मुख्य रूप से भाई-बहन के प्रेम और आपसी स्नेह के पर्व के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसकी परंपरा हजारों वर्ष पुरानी मानी जाती है और इसका संबंध सुरक्षा एवं कल्याण की कामना से भी रहा है। अथर्ववेद में सुरक्षा के लिए सोने और बहुमूल्य रत्नों को बांधने का उल्लेख मिलता है। वहीं रामायण में बताया गया है कि रानी कौशल्या ने भगवान राम के वनवास जाने से पहले औषधीय जड़ी-बूटियों से युक्त पवित्र रक्षा सूत्र तैयार किया था।
धार्मिक ग्रंथों में भविष्योत्तर पुराण में भी रक्षाबंधन का उल्लेख मिलता है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सावन महीने की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन मनाने की पूरी विधि के बारे में बताया था।
रक्षाबंधन के अवसर पर देशभर के मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। परिवारों के एकजुट होने और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मनाने के साथ पूरे देश में पर्व का उल्लास देखने को मिल रहा है।
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