एक दशक में डिजिटल पेमेंट की तस्वीर बदली, UPI ट्रांजैक्शन का मूल्य 0.07 लाख करोड़ से बढ़कर करीब 314 लाख करोड़ रुपये पहुंचा; PM मोदी ने लोगों से मांगे अनुभव
एक दशक में डिजिटल पेमेंट की तस्वीर बदली, UPI ट्रांजैक्शन का मूल्य 0.07 लाख करोड़ से बढ़कर करीब 314 लाख करोड़ रुपये पहुंचा; PM मोदी ने लोगों से मांगे अनुभव
भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति के सबसे बड़े माध्यमों में शामिल यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI ने मंगलवार को अपने 10 साल पूरे कर लिए। एक दशक पहले शुरू हुई यह भुगतान प्रणाली आज छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक के लिए रोजमर्रा के लेनदेन का अहम हिस्सा बन चुकी है। QR कोड स्कैन कर कुछ सेकंड में भुगतान करने की सुविधा ने लोगों की नकद पर निर्भरता काफी हद तक कम कर दी है।
UPI के 10 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के डिजिटल भुगतान सफर का एक बड़ा मोड़ बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर UPI इस्तेमाल करने वाले लोगों से अपने अनुभव साझा करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने लोगों से पूछा कि UPI ने उनके जीवन को किस तरह आसान बनाया और डिजिटल भुगतान की इस व्यवस्था से उनका अनुभव कैसा रहा।
UPI को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने भारतीय रिजर्व बैंक की निगरानी में 25 अगस्त 2016 को आम लोगों के लिए लॉन्च किया था। इससे पहले अप्रैल 2016 में 21 बैंकों के साथ इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। लॉन्च के बाद UPI से जुड़े बैंकों ने अपने UPI-सक्षम मोबाइल ऐप उपलब्ध कराए। दिसंबर 2016 में BHIM ऐप लॉन्च होने के बाद डिजिटल भुगतान को आम लोगों तक पहुंचाने में और तेजी आई।
एक दशक में 13 हजार गुना बढ़े UPI लेनदेन
वित्त मंत्रालय के आंकड़े UPI की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता की तस्वीर पेश करते हैं। वित्त वर्ष 2016-17 में UPI के जरिए महज 1.78 करोड़ लेनदेन हुए थे। यही आंकड़ा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गया। यानी करीब एक दशक में UPI लेनदेन की संख्या में लगभग 13 हजार गुना की बढ़ोतरी हुई है।
लेनदेन की संख्या के साथ-साथ उनके कुल मूल्य में भी जबरदस्त इजाफा हुआ। वित्त वर्ष 2016-17 में UPI के जरिए करीब 0.07 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए थे, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए। इस तरह UPI के जरिए होने वाले लेनदेन के कुल मूल्य में भी 4,000 गुना से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई।
11 देशों तक पहुंचा UPI
भारत में सफलता हासिल करने के बाद UPI अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहा है। वर्तमान में 11 देशों में UPI को स्वीकार किया जाता है। ग्रीस और मालदीव हाल के वर्षों में भारत के रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम को अपनाने वाले देशों में शामिल हुए हैं। इसके अंतरराष्ट्रीय विस्तार से विदेश जाने वाले भारतीयों के लिए भुगतान आसान होने के साथ-साथ भारत की डिजिटल भुगतान तकनीक को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है।
UPI एक रियल-टाइम भुगतान प्रणाली है, जिसके जरिए एक ही मोबाइल ऐप से अलग-अलग बैंक खातों को संचालित किया जा सकता है। इससे पैसे ट्रांसफर करने, दुकानदारों को भुगतान करने और कई तरह की बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करना आसान हो गया है। QR कोड आधारित भुगतान ने खास तौर पर छोटे कारोबारियों और ग्राहकों के लिए लेनदेन को बेहद सरल बना दिया है।
सुरक्षा और बिना ग्राहक शुल्क ने बढ़ाया भरोसा
UPI में डिजिटल भुगतान को सुरक्षित रखने के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसे सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल किया जाता है। इनका उद्देश्य बैंक खातों और भुगतान से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखना तथा अनधिकृत लेनदेन के जोखिम को कम करना है।
UPI की लोकप्रियता बढ़ाने में ग्राहकों के लिए भुगतान शुल्क नहीं होने की व्यवस्था ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरकार की व्यवस्था के तहत ग्राहकों से UPI भुगतान के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता, जबकि व्यापारियों से जुड़े MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट के प्रावधान अलग हैं। बिना अतिरिक्त शुल्क के तत्काल भुगतान की सुविधा ने छोटे से लेकर बड़े कारोबार तक डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दिया।
राजनाथ सिंह बोले—डिजिटल इंडिया की ताकत बना UPI
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी UPI के 10 वर्ष पूरे होने पर इसकी उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि UPI ने भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव किया है और लेनदेन को तेज, आसान, सुरक्षित और अधिक सुलभ बनाया है। उन्होंने इसे डिजिटल इंडिया की ताकत बताते हुए कहा कि तकनीक ने लोगों को सशक्त बनाने और वित्तीय समावेशन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
एक दशक के सफर में UPI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की पहचान बन चुका है। चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल, किराने की खरीदारी से लेकर कारोबारी भुगतान तक, QR कोड और मोबाइल से होने वाला भुगतान अब करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से लोगों से अपने अनुभव साझा करने की अपील इसी बदलाव की व्यापकता को दर्शाती है।
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